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न्यूयॉर्क में अराघची-विटकॉफ संपर्क पर ईरान में बढ़ा विवाद, तेहरान में उठे सवाल,

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच न्यूयॉर्क में हुए संपर्क को लेकर ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क की खबरों के बीच ईरान के कुछ रूढ़िवादी और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े मीडिया संस्थानों ने अराघची के कदम पर सवाल उठाए हैं।IRGC से संबद्ध तस्नीम न्यूज ने रिपोर्ट किया कि अराघची और विटकॉफ के बीच संपर्क ईरान की नीति-निर्धारण संस्थाओं की पूर्व स्वीकृति के बिना हुआ था। रिपोर्ट में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई के हवाले से कहा गया कि अराघची को मध्यस्थों के माध्यम से ईरान की सात शर्तें अमेरिका तक पहुंचाने की अनुमति थी। तस्नीम ने इस सीधे संपर्क को गंभीर गलती बताते हुए विदेश मंत्री से स्पष्टीकरण की मांग किए जाने की बात कही है।इस घटनाक्रम के बाद ईरानी संसद के कुछ सदस्यों और रूढ़िवादी धड़े की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर ईरानी नेतृत्व की ओर से यह संकेत भी मिले हैं कि अमेरिका के साथ बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं। ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार याह्या रहीम सफावी ने कहा है कि सर्वोच्च नेतृत्व ने सरकार को बातचीत के मामले में कुछ गुंजाइश दी है।ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस समय न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में ईरान की स्थिति का बचाव करते हुए कहा कि बातचीत संभव है, लेकिन ईरान दबाव या धमकी के सामने झुकने को तैयार नहीं है।ईरानी रूढ़िवादी मीडिया में राष्ट्रपति की न्यूयॉर्क यात्रा और अमेरिका के साथ कूटनीतिक संपर्क को लेकर भी आलोचना सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि ईरान के भीतर अमेरिका के साथ बातचीत के मुद्दे पर अलग-अलग विचार मौजूद हैं। एक ओर सरकार कूटनीतिक रास्ते खुले रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर कट्टरपंथी और IRGC से जुड़े प्रभावशाली वर्ग बातचीत की सीमा और तरीके को लेकर आपत्ति जता रहे हैं।अमेरिका की ओर से भी न्यूयॉर्क में हुई बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच अभी भी कई गंभीर मतभेद बने हुए हैं और किसी समझौते की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को आगे की कूटनीतिक बातचीत की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी अंतिम समझौते के रूप में।

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