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सुरक्षा परिषद में बदलाव जरूरी, दुनिया की मौजूदा तस्वीर दिखे: गुतारेस,

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने विश्व नेताओं से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की अपील की है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन वैश्विक संस्थाओं की संरचना अब भी काफी हद तक उस दौर को दर्शाती है, जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी।महासभा के 81वें सत्र की आम चर्चा की शुरुआत करते हुए गुतारेस ने अपने कार्यकाल के आखिरी उच्चस्तरीय संबोधन में कहा कि आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।गुतारेस ने सुरक्षा परिषद में अफ्रीका की स्थायी भागीदारी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के गठन के समय अफ्रीका का बड़ा हिस्सा औपनिवेशिक शासन के अधीन था, लेकिन आज भी महाद्वीप के पास सुरक्षा परिषद में कोई स्थायी सीट नहीं है।उन्होंने इसे बदलने की जरूरत बताते हुए कहा कि 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था में अफ्रीका की आवाज को अधिक मजबूत स्थान मिलना चाहिए। महासभा में मौजूद नेताओं ने उनके इस विचार का तालियों के साथ समर्थन कियागुतारेस ने कहा कि दुनिया अब स्पष्ट रूप से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी शक्ति के नए केंद्र सामने आ रहे हैं। साथ ही देशों के बीच मतभेद, असमानता और आपसी विश्वास की कमी जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।उन्होंने कहा कि मानवता एक साथ कई गंभीर और अभूतपूर्व संकटों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में वैश्विक समस्याओं से मिलकर निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मजबूत और प्रभावी होना जरूरी है।

सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग लंबे समय से भारत सहित G4 देशों—भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है। इन देशों का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में सुरक्षा परिषद की संरचना में व्यापक प्रतिनिधित्व होना चाहिए।गुतारेस के बयान ने एक बार फिर इस बहस को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता दी है। सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी प्रतिनिधित्व के विस्तार तथा क्षेत्रीय संतुलन को लेकर लंबे समय से चर्चा चलती रही है।महासचिव के तौर पर महासभा की उच्चस्तरीय चर्चा में यह गुतारेस का अंतिम संबोधन था। करीब 35 मिनट के भाषण के बाद जब वह मंच से नीचे उतरे, तो महासभा में मौजूद नेताओं, विदेश मंत्रियों, राजदूतों, राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया।दिसंबर 2026 में उनका पांच साल का दूसरा कार्यकाल समाप्त होने वाला है। अपने अंतिम उच्चस्तरीय भाषण में गुतारेस ने वैश्विक संस्थाओं को बदलती दुनिया के अनुरूप ढालने का संदेश दिया और सामूहिक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

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