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भारत के साथ रिश्तों को नए सिरे से शुरू करना चाहती है बालेन शाह सरकार: स्वर्णिम वागले,

नेपाल में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को बदलते राजनीतिक और आर्थिक माहौल के अनुरूप नए सिरे से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सहयोग को अब पुनर्निर्माण, व्यापार, कनेक्टिविटी, हवाई मार्ग और ऊर्जा जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों पर अधिक केंद्रित किया जाएगा। भारत की अपनी पहली उच्चस्तरीय यात्रा के दौरान वागले ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। बैठकों में नेपाल में हाल की प्राकृतिक आपदा के बाद पुनर्निर्माण, आर्थिक सहयोग, निवेश, ऊर्जा और दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। काठमांडू लौटने के बाद वागले ने कहा कि नेपाल की नई सरकार भारत के साथ संबंधों में मौजूद कठिन मुद्दों से बचना नहीं चाहती। सीमा विवाद जैसे संवेदनशील विषयों को भी बातचीत और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ाने की इच्छा है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंधों को केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय आर्थिक अवसरों और आपसी सहयोग के नजरिये से आगे ले जाने की जरूरत है। वागले ने यह भी कहा कि नेपाल अब उस पुराने दौर से आगे बढ़ना चाहता है, जिसमें नेपाली राष्ट्रवाद को भारत-विरोधी सोच के साथ जोड़कर देखा जाता था। उनका कहना है कि नई सरकार का जोर आर्थिक अवसरों, भारतीय सप्लाई चेन से जुड़ने और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को समय के अनुरूप बेहतर बनाने पर है। ऊर्जा क्षेत्र को भी भारत-नेपाल संबंधों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वागले ने नेपाल में चीन की बढ़ती भागीदारी को लेकर भारत की चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में नेपाल को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने इसे एक नई भू-राजनीतिक वास्तविकता के रूप में बताया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की भारत यात्रा को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, शाह की पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा वर्ष 2026 के अंत से पहले भारत की हो सकती है और दोनों देशों के बीच इस यात्रा को लेकर तैयारी चल रही है। हालिया घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि काठमांडू और नई दिल्ली के बीच आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी और पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख केंद्र में रह सकते हैं।

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