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मंडला में रेत भंडारण के लिए कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने का मामला, निष्पक्ष जांच की उठी मांग,

मंडला, 21 जुलाई 2026। मंडला जिले के खनिज विभाग में रेत भंडारण के लिए जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रेत भंडारण की अनुमति देने की प्रक्रिया में अनियमितताओं तथा नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों, ग्राम पंचायत स्तर और ठेकेदार वंशिका कंस्ट्रक्शन की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।आरोप है कि रेत भंडारण की अनुमति देने से पहले आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि प्रस्तुत किए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र की वैधता, ग्राम पंचायत की सहमति तथा संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।मामले को अनुसूचित क्षेत्र और पेसा कानून से भी जोड़ा जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण होती है तथा खनन एवं रेत भंडारण जैसी गतिविधियों के लिए निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। यदि इन नियमों की अनदेखी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने आरोपों की उच्चस्तरीय एवं पारदर्शी जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित पक्षों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण, स्थानीय समुदाय और शासन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।जानकारी के अनुसार, इस मामले से संबंधित एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें राज्य सरकार और संबंधित विभाग से जवाब मांगा गया है। मामले पर अंतिम निर्णय न्यायालय और सक्षम जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।

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