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कन्नौद-कुसमानिया में कथित अवैध क्लीनिकों का मामला,

देवास जिले के कन्नौद विकासखंड के कन्नौद नगर और कुसमानिया क्षेत्र में संचालित कुछ निजी क्लीनिकों को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक ऐसे क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जहां चिकित्सकों की योग्यता, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और संस्थानों के पंजीयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर स्वयं को डॉक्टर बताने वाले लोगों द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित दस्तावेजों और स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

GPS लोकेशन के साथ मौके पर पहुंची टीम

मामले की पड़ताल के दौरान हमारे संवाददाता अरुण उईके ने संबंधित क्लीनिकों और चिकित्सा संस्थानों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान संस्थानों के GPS लोकेशन सहित फोटो लिए गए, ताकि संबंधित स्थानों की पहचान और मौके की स्थिति को दर्ज किया जा सके।ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान लिए गए फोटो में संबंधित स्थानों पर चिकित्सा गतिविधियां संचालित होती दिखाई देने की बात सामने आई है। वहीं, मौके पर चिकित्सकीय डिग्री, मेडिकल रजिस्ट्रेशन अथवा संस्थान के पंजीयन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं मिली। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दस्तावेजों का आधिकारिक सत्यापन किया जाना आवश्यक है।

कहीं क्लीनिक तो कहीं नर्सिंग होम जैसी व्यवस्था?

स्थानीय शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर मरीजों को केवल ओपीडी परामर्श तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि इंजेक्शन, ड्रिप/बोतल और दवाइयां देने जैसी गतिविधियां भी की जाती हैं। कुछ जगहों पर मरीजों को भर्ती किए जाने जैसी व्यवस्था होने का भी दावा किया गया है।यदि किसी संस्थान में आवश्यक अनुमति, पंजीयन या योग्य चिकित्सा स्टाफ के बिना ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो यह मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए संबंधित संस्थानों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग से दस्तावेजों की जांच की मांग

GPS लोकेशन वाले फोटो मामले में मौके की स्थिति को दर्ज करने का आधार हैं। अब स्वास्थ्य विभाग से मांग है कि संबंधित सभी संस्थानों के:

  • चिकित्सक की मान्य शैक्षणिक योग्यता
  • मेडिकल काउंसिल/संबंधित प्राधिकरण में वैध रजिस्ट्रेशन
  • क्लीनिक या नर्सिंग होम का पंजीयन
  • मरीजों को भर्ती करने की अनुमति
  • इंजेक्शन और ड्रिप जैसी चिकित्सा सुविधाओं की वैधता

की जांच की जाए।

यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्थान के पास आवश्यक योग्यता, पंजीयन या अनुमति नहीं पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

मुख्य मार्ग के आसपास संचालन, फिर निगरानी क्यों?

कुसमानिया क्षेत्र में मुख्य मार्ग के आसपास कई क्लीनिक संचालित होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि इन संस्थानों का संचालन लंबे समय से हो रहा है, तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया?यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुख्य मार्ग से आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का भी आवागमन होता है।

BMO को जानकारी देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

स्थानीय शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कन्नौद के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) को भी इन क्लीनिकों के संबंध में जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शिकायत मिलने के बाद विभाग ने संबंधित संस्थानों के दस्तावेजों की जांच की है या नहीं और यदि जांच हुई है तो उसका परिणाम क्या रहा।

ग्रामीण मरीजों की मजबूरी का सवाल

कुसमानिया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त समय तक डॉक्टर उपलब्ध रहें और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हों, तो ग्रामीणों को निजी क्लीनिकों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।मामला केवल किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता से जुड़ा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

कौन-सा क्लीनिक पंजीकृत है?
किस चिकित्सक के पास मान्य डिग्री और वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन है?
किस संस्थान को मरीज भर्ती करने की अनुमति है?
और कहां इंजेक्शन या ड्रिप जैसी सुविधाएं देने की वैधानिक अनुमति है?

इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

GPS लोकेशन के साथ सामने आए इन संस्थानों की विभाग कब जांच करता है और जांच में यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो क्या कार्रवाई की जाती है, अब इस पर सभी की नजर है।

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