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अजरबैजान ने दिखाया चीन का HQ-9BE एयर डिफेंस सिस्टम, काकेशस में बदला सामरिक समीकरण,

अजरबैजान ने 30 सितंबर को बाकू में आयोजित ADEX 2026 डिफेंस प्रदर्शनी के दौरान चीन के लंबी दूरी के HQ-9BE सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम (SAM) को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया। इस कदम ने अजरबैजान की वायु रक्षा क्षमता और उसके मौजूदा रूसी तथा इजरायली सिस्टम के साथ भविष्य के सैन्य संतुलन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।अजरबैजान लंबे समय से रूसी और इजरायली मूल के कई एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करता रहा है। उसकी मौजूदा वायु रक्षा संरचना में S-300PMU-2, Buk, Tor, S-125, Spyder और Barak सीरीज जैसे सिस्टम शामिल हैं। ऐसे में चीनी HQ-9BE का शामिल होना देश की वायु रक्षा व्यवस्था में एक नई लंबी दूरी की परत जोड़ता है।HQ-9BE की खासियत क्या है?HQ-9BE, चीन के HQ-9 परिवार का एक्सपोर्ट-ओरिएंट है। इसकी प्रमुख भूमिका लंबी दूरी पर आने वाले हवाई खतरों का पता लगाना और उन्हें इंटरसेप्ट करना है।उपलब्ध तकनीकी दावों के मुताबिक, सिस्टम का इंटरसेप्टर विमान जैसे लक्ष्यों के खिलाफ लगभग 260 किलोमीटर तक की अधिकतम एंगेजमेंट रेंज प्रदान कर सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभावी रेंज लक्ष्य के प्रकार, ऊंचाई, उड़ान पथ और अन्य परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करती है।HQ-9 परिवार की मिसाइलों में सॉलिड-प्रोपेलेंट मोटर और आधुनिक गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें इनर्शियल नेविगेशन, कमांड करेक्शन और टर्मिनल चरण में एक्टिव रडार होमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बताया जाता है।एक HQ-9BE लॉन्चर पर सामान्यतः चार बड़े मिसाइल कैनिस्टर लगाए जाते हैं। सिस्टम को लंबी दूरी के विमानों के साथ-साथ कुछ अन्य हवाई खतरों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है।क्या अजरबैजान का रूसी एयर डिफेंस से भरोसा उठा?HQ-9BE की खरीद या तैनाती को सीधे तौर पर रूसी हथियार प्रणालियों पर अजरबैजान के भरोसे में कमी के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।अजरबैजान पहले से रूसी मूल के कई एयर डिफेंस सिस्टम संचालित करता है और नई चीनी प्रणाली का शामिल होना उसकी वायु रक्षा को विविध बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। अलग-अलग देशों से सिस्टम खरीदने से किसी देश को तकनीकी विकल्प, अलग-अलग सेंसर और इंटरसेप्टर क्षमताओं तथा सप्लाई सोर्स में विविधता मिल सकती है।इसलिए HQ-9BE का आना जरूरी नहीं कि रूसी S-300 या अन्य प्रणालियों के तत्काल विकल्प के तौर पर देखा जाए। बल्कि इसे अजरबैजान की बहु-स्तरीय वायु रक्षा संरचना में एक अतिरिक्त क्षमता के रूप में समझना अधिक उचित होगा।रूस, चीन और इजरायल के सिस्टम का मिश्रणअजरबैजान की वायु रक्षा व्यवस्था पहले से ही कई देशों की तकनीक पर आधारित है। रूसी S-300, Buk और Tor जैसे सिस्टम के साथ देश ने इजरायली Spyder और Barak परिवार की प्रणालियां भी अपनाई हैं।अब HQ-9BE के आने से चीन भी इस मिश्रित एयर डिफेंस नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इससे अजरबैजान को लंबी दूरी की वायु रक्षा के क्षेत्र में एक अतिरिक्त विकल्प मिलता है।हालांकि अलग-अलग देशों की प्रणालियों को एक ही नेटवर्क में प्रभावी ढंग से जोड़ना अपने आप में तकनीकी चुनौती है। इसकी वास्तविक सैन्य उपयोगिता केवल मिसाइल की अधिकतम रेंज से तय नहीं होती, बल्कि रडार कवरेज, कमांड एंड कंट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, नेटवर्क इंटीग्रेशन और चालक दल के प्रशिक्षण जैसे कारकों पर भी निर्भर करती है।आर्मेनिया के पास भारतीय आकाश सिस्टमअजरबैजान के HQ-9BE के प्रदर्शन के बीच आर्मेनिया की भारतीय आकाश एयर डिफेंस प्रणाली को लेकर भी ध्यान बढ़ा है। आकाश को मध्यम दूरी की वायु रक्षा के लिए विकसित किया गया है और यह लड़ाकू विमानों, ड्रोन तथा अन्य हवाई खतरों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए डिजाइन की गई है।इस लिहाज से दोनों देशों की वायु रक्षा संरचनाओं में अलग-अलग स्तर की क्षमताएं दिखाई देती हैं। HQ-9BE मुख्य रूप से लंबी दूरी की वायु रक्षा की भूमिका निभाता है, जबकि आकाश मध्यम दूरी की वायु रक्षा पर केंद्रित है।इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों प्रणालियां सीधे तौर पर एक-दूसरे की समान श्रेणी की प्रतिद्वंद्वी हैं। दोनों की भूमिका, रेंज और परिचालन अवधारणा अलग है।काकेशस में बढ़ता एयर डिफेंस फोकसअजरबैजान और आर्मेनिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सुरक्षा तनाव के बीच दोनों देशों की सैन्य खरीद पर लगातार नजर रहती है। ऐसे माहौल में नई एयर डिफेंस प्रणालियों का शामिल होना क्षेत्र की सैन्य क्षमताओं में बदलाव का संकेत जरूर देता है।HQ-9BE के प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि अजरबैजान अपनी लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत और विविध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर, आर्मेनिया की भारतीय प्रणालियों में रुचि यह दिखाती है कि काकेशस क्षेत्र में भारत और चीन की रक्षा तकनीकें भी अप्रत्यक्ष रूप से एक ही सामरिक परिदृश्य में दिखाई देने लगी हैं।

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