फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल ही में संपन्न फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) की सराहना करते हुए इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक और दूरगामी कदम बताया है। प्रधानमंत्री ओर्पो ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऐसे व्यापक व्यापार समझौते दुनिया के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलते हैं।प्रधानमंत्री ओर्पो ने रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “आज की दुनिया में व्यापार समझौतों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। हमें वैश्विक स्तर पर टैरिफ बढ़ाने के बजाय मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को प्रोत्साहित करना चाहिए। भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह समझौता न केवल दोनों पक्षों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सकारात्मक संकेत है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में सहयोग और खुले बाजार की नीतियां ही सतत विकास का आधार बन सकती हैं।प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईयू–भारत व्यापार समझौते का स्वागत किया और इसे साझा विकास एवं समृद्धि के लिए “कैटलिस्ट” बताया। बयान में कहा गया कि यह समझौता निवेश, नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल सहयोग और आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ीकरण के क्षेत्रों में नई ऊर्जा प्रदान करेगा। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि यह डील दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएगी।उल्लेखनीय है कि जनवरी में इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा उर्सुला वॉन डेर लेयेन, एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त रूप से की थी। व्यापक दायरे और बहु-क्षेत्रीय प्रावधानों के कारण इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के रूप में भी संबोधित किया गया है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 27 जनवरी को नई दिल्ली में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित हुआ। लगभग दो दशकों तक चली वार्ताओं, विभिन्न दौर की बातचीत और कई उतार-चढ़ाव के बाद यह समझौता संभव हो पाया है। इस एफटीए के लागू होने से लगभग 200 करोड़ लोगों का एकीकृत बाजार सशक्त होगा, जिससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। एक ओर जहां विश्व के कई हिस्सों में संरक्षणवादी नीतियां और टैरिफ बाधाएं बढ़ रही हैं, वहीं भारत और ईयू का यह कदम मुक्त व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।फिनलैंड के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है और यूरोप के लिए एक विश्वसनीय साझेदार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता नवाचार, सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में संयुक्त पहलों को गति देगा।