मैं डॉ अशोक मर्सकोले मंडला के आमनागरिक के रूप मंडला के नए नामकरण की बात पर मेरी प्रतिक्रिया! एव असहमति!

“मंडला कोई साधारण नगर या नाम नहीं जिसको किसी या कोई प्लानिंग से कोई एक मंचीय बयान से नाम बदला जा सके!मंडला! गोंडवाना साम्राज्य और उसके 1750 साल से ज़्यादा के उसके गौरवशाली इतिहास शौर्य त्याग बलिदान के साथ ही आदिवासी पहचान स्वाभिमान का प्रतीक भी है जिसकोआसानी से बदला नहीं जा सकता! “यहां बात किसी समाज के विरोध या असहमति की नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक जीवंत प्रमाण और इतिहास के सम्मान और रक्षा की जनभावनाओं की है!”किसी एक दो मंत्रीयों के बिना सोचे समझे दिए एक बयान से जो मंडला गोंडवाना की राजधानी रहा है—यह ऐतिहासिक सत्य है, विकल्प नहीं।इस नाम को कैसे भूला मिटा सकते?? जब गढ़ मंडला से नगाड़ों की गूंज उठती थी तो 52 गढ़ 57 परगना में उसकी गूँज से पूजन और नृत्य की थिरकन जी उठती थी! इसको कैसे भूला दें! ;कैसे भूला दें गोंडवाना साम्राज्य के संगीत तंत्र के हृदय सम्राट हिरदेशाह जी को !निज़ाम शाह जी को !दलपत शाह जी को!रानी दुर्गावती जी को !राजा शंकरशाह कुंवर रघुनाथ शाह जी के गौरवशाली विरासत इतिहास त्याग और बलिदान के इतिहास से मंडला का नाम कैसे मिटा दें!मंडला गोंडवाना की ऐतिहासिक राजधानी के साथ आदिवासी इतिहास, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक भी है।एक बार फ़िर से उन जनभावनाओं का भी हम सम्मान करते हैं जो महिष्मति नगर के नाम नामकरण की बात कर रहे हैं, पर इतिहास और स्पष्ट प्रमाण तो मंडला के पक्ष दर्शाते हैं !इस विषय पर सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इसके लिए मंडला के प्रभारी मंत्री और मंडला की विधायक और मंत्री संपतिया उइके जी बिना चर्चा+विचार विमर्श और जनमानस की जनभावना समझे बयान दिए जा रहे हैं जो तर्कसंगत नहीं, कुछ विषय राजनीति से ऊपर भावनात्मक लगाव और अस्मिता से जुड़े होते हैं उस पर बहुत सोच समझकर बयान देना चाहिए एक पक्षीय बयान से पूरे मंडला के इतिहास जानने वाले प्रबुद्धजन और आदिवासी समाज में रोष होना स्वाभाविक है।

मंडला के आम नागरिक होने के नाते मेरा कहना है कि—नाम बदलना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं ,यह एक पूरे समाज की पहचान से जुड़ा विषय है। मंडला के जनमानस और आदिवासी समाज की बिना चर्चा विचार सहमति से ऐसा कोई भी बयान या प्रयास यहां की जनभावना और संविधान की भावना के विरुद्ध है।बीजेपी सरकार नाम बदलने पर बहुत एक्टिव रहती है यहां सरकार यह बताए कि क्या यह निर्णय आदिवासी समाज की सहमति से लिया गया है? यदि नहीं, तो ऐसे बयान तुरंत वापस लिए जाएँ।क्योंकि मंडला के इतिहास, नाम और गौरव के साथ किसी भी प्रकार का एक पक्षीय समझौता एक छलावा और अन्याय है,प्रभारी मंत्री और मंडला की विधायक मंत्री या सरकार पीछे हटे, संवाद करे और इस विषय को विवाद न बनने दे—यही लोकतंत्र है।”।महिष्मति नगरी के संबंध में कुछ स्पष्ट तथ्य ;-तथ्य:महिष्मति: = महेश्वर (खरगोन) के पक्ष में इतिहासकार औरप्रमाण: रामायण, महाभारत, पुराण, पुरातत्व भी महिष्मति=महेश्वर (खरगोन) के पक्ष में प्रमाण देते हैं!मंडला के पक्ष में नहीं!मंडला के स्पष्ट प्रमाण गोंडवाना साम्राज्य कॉल का रहा है और इस प्रमाण और गौरवशाली इतिहास और धरोहर के नाम को बदला नहीं जा सकता! न बदला जाना चाहिए़!डॉ अशोक मर्सकोले मंडला के एक आमनागरिक होने के नाते अपनी बात रखा है।

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