बांग्लादेश–भारत संबंधों में तनाव: शेख हसीना के बयानों पर ढाका की आपत्ति, भारतीय उच्चायुक्त,

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और कट्टरवाद को बढ़ावा दे रही है। भारत में निर्वासन के दौरान दिए गए उनके बयानों से ढाका की वर्तमान सत्ता असहज नजर आ रही है।इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश सरकार ने न केवल शेख हसीना पर नाराजगी जताई है, बल्कि भारत के प्रति भी असंतोष व्यक्त किया है। इसी क्रम में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि शेख हसीना के हालिया बयान भड़काऊ हैं और भारत को अपनी धरती से ऐसे ढाका-विरोधी वक्तव्यों की अनुमति नहीं देनी चाहिए, क्योंकि इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध प्रभावित होते हैं। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि शेख हसीना भारत से अपने समर्थकों को बांग्लादेश में आतंकी गतिविधियों के लिए उकसा रही हैं और उनका उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को विफल करना है।बयान में यह भी कहा गया कि बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान कमाल के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। उल्लेखनीय है कि हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना पिछले वर्ष अगस्त में भारत आई थीं। ढाका की एक विशेष अदालत ने हाल ही में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है, जिसके आधार पर बांग्लादेश सरकार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।इस बीच, एक साक्षात्कार में शेख हसीना ने कहा कि 1971 से अब तक अवामी लीग को बांग्लादेश की जनता ने नौ बार सत्ता सौंपी है। ऐसे में इतनी बड़ी पार्टी को चुनाव से बाहर रखना अव्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी होते हैं तथा जनता की इच्छा का सम्मान किया जाता है, तो अवामी लीग सरकार या विपक्ष—दोनों भूमिकाओं को स्वीकार करेगी। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि आगामी चुनावों में जनमत के बजाय मतदाताओं पर लगी पाबंदियां अधिक प्रतिबिंबित हो सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *