अरुणाचल विवाद पर चीन का साथ देने मैदान में उतरा पाकिस्तान, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति,

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर चल रहे विवाद में अब पाकिस्तान भी कूद पड़ा है। चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान का पाकिस्तान ने खुलकर समर्थन किया है, जिसमें चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया था। इस बयान के बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश से संबंधित एक भारतीय महिला को एयरपोर्ट पर घंटों रोके रखा, जिसके चलते विवाद और गहरा गया।पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने अपने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान ने चीन के बयान को ध्यान से नोट किया है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान हमेशा से चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता रहा है और आगे भी यही नीति जारी रहेगी। चीन और पाकिस्तान के इस रुख ने भारत के प्रति उनके साझा रुख को एक बार फिर उजागर किया है।संवाददाता सम्मेलन में अंद्राबी ने सिर्फ चीन के दावे का समर्थन नहीं किया, बल्कि अफगान तालिबान पर भी बेबुनियाद आरोप लगाते हुए कहा कि बातचीत में अफगान प्रतिनिधिमंडल सहयोग नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, भारत ने चीन की हरकत को लेकर सख्त आपत्ति जताई है। भारत ने स्पष्ट कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, और चीन का दावा पूरी तरह से निराधार है।चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश पर दावा जताना कोई नई बात नहीं है। वह कई दशकों से अरुणाचल प्रदेश को “दक्षिण तिब्बत” बताकर अपनी मंशा जाहिर करता रहा है। भारतीय नागरिकों को हिरासत में लेना, वीज़ा रोक देना या सीमावर्ती क्षेत्रों पर दबाव बनाना—ये कदम चीन कई बार उठा चुका है। चीन की यह आदत सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है; ताइवान पर भी वह इसी तरह जोर-जबर्दस्ती से अपना दावा ठोकता रहता है।अरुणाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह राज्य भारत के पूर्वोत्तर में स्थित है तथा इसकी सीमाएँ भूटान, चीन और म्यांमार से लगती हैं। अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों में अरुणाचल प्रदेश को हमेशा भारत का हिस्सा माना गया है। यहाँ तक कि चीन ने अपने आधिकारिक नक्शों में न सिर्फ अरुणाचल प्रदेश, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर को भी अवैध रूप से अपना बताया है। हालांकि, बीजिंग में आयोजित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के दूसरे समिट में चीन ने एक मानचित्र पर जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दिखाया था।

उधर, चीन के लगातार दबाव के बीच ताइवान ने अपनी सुरक्षा क्षमताएँ बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 40 अरब डॉलर से अधिक का रक्षा बजट पेश किया है। अमेरिका से हथियारों की खरीद और जापान द्वारा ताइवान के निकट योनागुनी द्वीप पर नई मिसाइल तैनाती क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और मैकमोहन रेखा लंबे समय से विवाद का कारण रहे हैं। भारत इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन चीन इसका विरोध करता है और क्षेत्रीय दावे लगातार बढ़ा रहा है। चीन ने पश्चिम अक्साई चिन के बड़े हिस्से पर पहले से ही अवैध कब्जा कर रखा है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव समय-समय पर बढ़ता रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *