
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद पड़ोसी देश चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह दौरा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भागीदारी के उद्देश्य से हो रहा है। इस यात्रा को लेकर न केवल भारत और चीन, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।इस समय भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू किया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री का चीन दौरा रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उदाहरण के तौर पर हिमालयी सीमा पर सैनिकों के बीच मिठाइयों का आदान-प्रदान, भारतीय तीर्थयात्रियों के दक्षिण-पश्चिमी चीन के जिजांग स्वायत्त क्षेत्र की यात्रा का पुनः आरंभ होना और दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स की संभावनाओं की घोषणा जैसे संकेत दर्शाते हैं कि दोनों एशियाई महाशक्तियां 75वें कूटनीतिक संबंध वर्ष के मौके पर संपर्क और संवाद बढ़ा रही हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा सीमा विवाद सहित व्यापारिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में अहम भूमिका निभा सकता है।विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की कूटनीतिक नीति में संतुलन और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।