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2033 तक F5 की देरी, भारत की 114 राफेल डील और डिलीवरी टाइमलाइन पर उठे सवाल,

फ्रांसीसी वायुसेना के प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर ने संकेत दिए हैं कि फ्रांस 2033 तक राफेल F5 लड़ाकू विमान का इंतजार नहीं कर सकता। सीनेट की एक समिति के समक्ष बंद कमरे में हुई बैठक की सार्वजनिक की गई कार्यवाही के अनुसार उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए फ्रांसीसी वायुसेना को फिलहाल अधिक संख्या में राफेल F4 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है, क्योंकि F5 के उत्पादन और तैनाती में अभी कई वर्ष लगेंगे।जनरल बेलेंजर ने राफेल F4 को अत्यंत सक्षम बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान बताते हुए कहा कि तत्काल सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए इसी संस्करण की खरीद अधिक व्यावहारिक होगी। हालांकि उन्होंने यूक्रेन युद्ध का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया, लेकिन बदलते भू-राजनीतिक माहौल और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों की ओर इशारा किया।फ्रांस ने अपने सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत 20 राफेल F5 विमानों का ऑर्डर दिया है, लेकिन इनकी डिलीवरी पहले 2031–32 में प्रस्तावित थी, जिसे अब बढ़ाकर 2033–34 कर दिया गया है। यह देरी भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि भारतीय वायुसेना के लिए प्रस्तावित 114 राफेल विमानों में कम से कम 24 विमान F5 मानक के होने की चर्चा है।राफेल F5 को अब तक का सबसे उन्नत संस्करण माना जा रहा है। इसमें अधिक शक्तिशाली M88 T-REX इंजन, ‘मैन्ड–अनमैन्ड टीमिंग (MUM-T)’ क्षमता, ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन के साथ संचालन, भविष्य में स्टील्थ कॉम्बैट ड्रोन के साथ एकीकृत मिशन क्षमता तथा लंबी दूरी के अत्याधुनिक हथियारों को शामिल करने की योजना है। इसके अलावा इसमें नई पीढ़ी की हाइपरसोनिक परमाणु-सक्षम क्रूज़ मिसाइलों के एकीकरण का भी लक्ष्य रखा गया है, जिससे इसकी मारक क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी।

वर्तमान में फ्रांस के पास लगभग 165 राफेल लड़ाकू विमान हैं, जबकि वर्ष 2035 तक यह संख्या बढ़ाकर 225 करने का लक्ष्य है। दूसरी ओर Dassault Aviation को भारत, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, मिस्र, कतर, ग्रीस, क्रोएशिया और सर्बिया सहित कई देशों के लिए भी बड़ी संख्या में राफेल विमानों की आपूर्ति करनी है। यदि भारत की 114 विमानों की संभावित डील और यूक्रेन की रुचि भविष्य में वास्तविक ऑर्डर में बदलती है, तो कंपनी के सामने उत्पादन क्षमता और समय पर डिलीवरी सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। राफेल F5 भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित युद्ध, ड्रोन सहयोग और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। हालांकि इसकी वास्तविक परिचालन क्षमता और प्रदर्शन का आकलन इसके सेवा में आने के बाद ही संभव होगा। वहीं, भारत के लिए सबसे बड़ा प्रश्न यह रहेगा कि यदि वह F5 संस्करण का चयन करता है, तो उसकी डिलीवरी समय-सीमा भारतीय वायुसेना की तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को किस हद तक प्रभावित करेगी।

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