भोपाल, 26 सितंबर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। नए मास्टर प्लान में भोपाल के भविष्य के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, रोजगार, यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है। अब प्रशासन की ओर से इस प्रारूप पर आम नागरिकों से दावे-आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। योजना का ड्राफ्ट प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण, आधुनिक एवं नागरिक हितैषी विकास, शहर में आवश्यक बदलावों को बढ़ावा देने तथा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार जैसे चार प्रमुख आधारों पर तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप सामने आया है, जिसमें भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं, सुगम आवागमन और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। मास्टर प्लान में करीब 3 हजार हेक्टेयर भूमि को ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित किया गया है और लगभग 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर ईकेएआई सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक एवं थोक व्यापार क्षेत्रों सहित शहर के विभिन्न उपनगरों को जोड़ने का काम करेगा। प्रस्तावित ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई एवं डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और आवासीय गतिविधियों के विकास का प्रावधान किया गया है। यहां मिश्रित उपयोग और अधिक घनत्व वाले विकास को बढ़ावा देने की योजना है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में परिवर्तित किया जा सकेगा। इसके अलावा विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्गों को भी ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित मास्टर प्लान के जरिए भोपाल के विकास को पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के साथ संतुलित रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में रोडमैप तैयार किया गया है।