मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में चीतों के सफल पुनर्स्थापन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए जा रहे सामूहिक प्रयासों की सराहना मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है। प्रधानमंत्री से मिली यह सराहना वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रदेश के वनकर्मियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान करती है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्यजीव सप्ताह-2026 के अवसर पर प्रदेशवासियों तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी मैदानी साथियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट चीता की सफलता ने मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के संकल्प को और मजबूत किया है। इस उपलब्धि के पीछे वन विभाग के मैदानी अमले, अधिकारियों, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों का निरंतर समर्पण महत्वपूर्ण रहा है।उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। वन्यजीवों का संरक्षण केवल जैव-विविधता की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश में वन पर्यटन को भी नई दिशा और गति मिल सकती है।वन्यजीव संरक्षण में भारत की उपलब्धियों का उल्लेखमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वन्यजीव सप्ताह के संदर्भ में 30 सितंबर को देशवासियों के नाम संदेश जारी किया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि पिछले एक दशक में भारत ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और प्रोजेक्ट चीता इसकी प्रमुख उपलब्धियों में से एक है।प्रधानमंत्री ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गैंडा, घड़ियाल, स्लॉथ बियर, नदी डॉल्फिन और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास भारत में वन्यजीव संरक्षण के लगातार व्यापक होते दायरे को दर्शाते हैं।बिग कैट संरक्षण में भारत की भूमिकाप्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के माध्यम से बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। इसके माध्यम से बाघ, शेर, तेंदुआ और जगुआर जैसी प्रमुख प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े अनुभवों को विभिन्न देशों के साथ साझा करने और उनसे सीखने का अवसर मिल रहा है।उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और प्रकृति के संतुलन के लिए उनके प्राकृतिक आवासों का आपस में जुड़ा होना जरूरी है। केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर वन्यजीव कॉरिडोरों की पहचान और उनके संरक्षण पर लगातार कार्य कर रही है।मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व पर जोरप्रधानमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता में अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणकर्मियों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना भी जरूरी है।इसके लिए समय पर सूचना और त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि जब हमारे जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, तभी प्रकृति का संतुलन बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रखी जा सकेगी।