
पाकिस्तान के भारत से सटे इलाकों में चीन निर्मित SH-15 व्हील्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर की कथित तैनाती की खबरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, इस तैनाती की हालिया रिपोर्टों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह तैनाती सही साबित होती है तो इसे केवल एक सैन्य घटनाक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि चीन और पाकिस्तान के बीच लगातार गहरे होते रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।ओआरएफ के विश्लेषण के अनुसार, पाकिस्तान पिछले एक दशक में चीनी तकनीक, वित्तीय सहयोग और औद्योगिक साझेदारी के जरिए अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को लगातार आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर, चीन पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के साथ-साथ अपनी रक्षा तकनीक के परिचालन इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देखता रहा है।
SH-15 से पाकिस्तान की आर्टिलरी क्षमता में बढ़ोतरी
SH-15 चीन की PCL-181 155mm/52-कैलिबर व्हील्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर का निर्यात संस्करण है। इसकी खासियत इसकी बेहतर गतिशीलता, लंबी दूरी तक फायर करने की क्षमता और अपेक्षाकृत सटीक निशाना साधने की क्षमता है। पाकिस्तान ने वर्ष 2019 में चीन की NORINCO से 236 ऐसे सिस्टम का अनुबंध किया था। इनकी डिलीवरी 2022 में शुरू हुई और 2023 तक जारी रही।समझौते में तकनीक हस्तांतरण से जुड़ी व्यवस्था भी शामिल थी। इसके चलते पाकिस्तान में हैवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला के माध्यम से इन प्रणालियों की स्थानीय असेंबली की दिशा में भी काम हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की रणनीति केवल विदेशी हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूत करना चाहता है।करीब 250 SH-15 सिस्टम की कथित तैनाती की खबरें इस ओर संकेत करती हैं कि पाकिस्तान की कई आर्टिलरी रेजिमेंट इन प्रणालियों से लैस हो सकती हैं। हालांकि, इस संख्या और तैनाती की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
विशेषज्ञों का मानना है कि SH-15 की मौजूदगी अकेले भारत-पाकिस्तान के सैन्य संतुलन को पूरी तरह बदलने वाली नहीं है। लेकिन यह पाकिस्तान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को धीरे-धीरे मजबूत करने वाली प्रक्रिया का हिस्सा जरूर है।तेजी से स्थान बदलने की क्षमता, लंबी दूरी तक फायरिंग और बेहतर सटीकता जैसे गुण पाकिस्तान की आर्टिलरी क्षमता को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। ऐसी प्रणालियां संभावित संकट की स्थिति में काउंटर-बैटरी ऑपरेशन, लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाने और स्टैंड-ऑफ फायर की क्षमता को बढ़ा सकती हैं।इसके अलावा पाकिस्तान के रॉकेट आर्टिलरी और प्रिसिजन-स्ट्राइक सिस्टम के बढ़ते भंडार के साथ SH-15 जैसी प्रणालियां उसके पारंपरिक सैन्य विकल्पों को और मजबूत कर सकती हैं।
गलत आकलन से बढ़ सकता है तनाव
रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, सीमा के करीब लंबी दूरी की आधुनिक आर्टिलरी प्रणालियों की तैनाती संकट के दौरान दोनों पक्षों के लिए फैसले लेने की समय-सीमा को प्रभावित कर सकती है। ऐसे माहौल में किसी भी सैन्य गतिविधि की गलत व्याख्या तनाव को तेजी से बढ़ा सकती है।इसलिए SH-15 की कथित तैनाती को केवल हथियारों की संख्या के नजरिए से देखने के बजाय चीन-पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा सहयोग, पाकिस्तान की स्थानीय रक्षा उत्पादन क्षमता और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन में हो रहे क्रमिक बदलाव के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण होगा।फिलहाल तैनाती से जुड़ी रिपोर्टों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। इसके बावजूद यह घटनाक्रम भारत के लिए पाकिस्तान की बदलती पारंपरिक सैन्य क्षमताओं और चीन के साथ उसके बढ़ते रणनीतिक तालमेल पर लगातार नजर रखने की जरूरत को रेखांकित करता है।