लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह ने अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच हुए फ्रेमवर्क समझौते को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। संगठन के प्रमुख नईम कासिम ने शनिवार को जारी बयान में इस समझौते को “एकतरफा”, “अपमानजनक” और “लेबनान की संप्रभुता के खिलाफ” बताया।नईम कासिम ने आरोप लगाया कि यह समझौता इजरायल के हितों को प्राथमिकता देता है और इसमें लेबनान के राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह इस समझौते को लेबनान सरकार की गंभीर भूल मानता है और इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा।शुक्रवार को वॉशिंगटन में हस्ताक्षरित इस फ्रेमवर्क समझौते में इजरायली सेना की वापसी, लेबनान के कुछ क्षेत्रों की स्थिति तथा हिजबुल्लाह के निशस्त्रीकरण से जुड़े प्रावधान शामिल बताए गए हैं। इस समझौते पर अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर और अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमदेह मोआवाद ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।हिजबुल्लाह का कहना है कि इजरायल को लेबनान की भूमि से बिना किसी शर्त के हटना चाहिए और संगठन ने ईरान-अमेरिका के बीच हुए पूर्व समझौते (एमओयू) में शामिल युद्धविराम संबंधी प्रावधानों को लागू करने की मांग की है।घटनाक्रम के बाद लेबनान में लंबे समय से जारी संघर्ष के समाप्त होने और स्थायी शांति स्थापित होने की संभावनाओं पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि इस फ्रेमवर्क समझौते में हिजबुल्लाह को पक्षकार के रूप में शामिल नहीं किया गया है।