आदिवासी साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से भोपाल में प्रथम अखिल भारतीय आदिवासी साहित्यिक महोत्सव–2026 का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव को लेकर शनिवार को राजधानी स्थित अजाक्स भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजन की रूपरेखा साझा की गई।पराक्रम जनसेवी संस्थान के अध्यक्ष एवं संस्थापक शरद सिंह कुमरे ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य देशभर के आदिवासी साहित्यकारों, कवियों, लेखकों, शोधकर्ताओं, कलाकारों और बुद्धिजीवियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को देश के सामने प्रस्तुत कर सकें।उन्होंने कहा कि आदिवासी साहित्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि प्रकृति, इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जीवन का जीवंत दस्तावेज है। यह महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, युवा रचनाकारों को प्रोत्साहित करने तथा विभिन्न जनजातीय भाषाओं और लोक साहित्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज की सकारात्मक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी व्यापक विमर्श किया जाएगा। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।आयोजन समिति ने बताया कि महोत्सव के दौरान साहित्यिक गोष्ठियां, कविता पाठ, पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, लोक ज्ञान और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को व्यापक मंच मिलेगा।संस्थान ने प्रदेश और देशभर के साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, मीडिया प्रतिनिधियों और आमजन से इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता का आह्वान किया है। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयासों से आदिवासी साहित्य और संस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई जा सकती है।