
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास और आम नागरिकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में बुनियादी ढांचे, सिंचाई, खेल, बिजली, न्याय व्यवस्था, स्वास्थ्य शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं को मजबूत करने से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए।कैबिनेट के फैसलों का सीधा संबंध प्रदेश के किसान, युवा, खिलाड़ी और आम नागरिक से जुड़ा दिखाई देता है। खास तौर पर सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जबकि 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसरों की योजना ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
किसानों के खेतों तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी
बैठक में नीमच की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 4,197 करोड़ 58 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। यह परियोजना 2026 से 2031 तक जारी रहेगी। इसका उद्देश्य आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई तकनीक के माध्यम से पानी की बचत करते हुए सिंचाई क्षमता और कृषि उत्पादकता को बढ़ाना है।राजगढ़ की सुठालिया सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रुपये तथा पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से राजगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।किसानों के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि सिंचाई की बेहतर सुविधा से खेती बारिश पर कम निर्भर हो सकती है और फसल उत्पादन के लिए पानी की उपलब्धता अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
हर विधानसभा क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को अवसर
प्रदेश के 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसरों के निर्माण और संचालन के लिए 962 करोड़ 50 लाख रुपये की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। इन परिसरों का नाम मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स रखा जाएगा।स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाएं उपलब्ध होने से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए बेहतर आधार मिल सकता है। यानी प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए बड़े शहरों तक निर्भरता कम करने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण हो सकती है।प्रदेश की भविष्य की बिजली जरूरतों को देखते हुए 2800 मेगावॉट ताप विद्युत खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से मध्यप्रदेश में मौजूद, निर्माणाधीन तथा प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजनाओं से बिजली खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।इस फैसले का उद्देश्य आने वाले वर्षों में प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।कैबिनेट ने ग्राम न्यायालय योजना के लिए 554 करोड़ 61 लाख रुपये, विधिक सहायता एवं विधिक सलाह बोर्ड के लिए 524 करोड़ रुपये, परिवार न्यायालयों के संचालन के लिए 1,000 करोड़ रुपये तथा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से संबंधित योजना के लिए 2,015.60 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।