
भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से भारी बारिश का दौर थमने के बाद मानसून की गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं। सोमवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहे, जबकि कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार 5 अगस्त तक मौसम का यही रुख बना रह सकता है, लेकिन 6 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण मानसून एक बार फिर सक्रिय होने और कई जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है।
सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश
लगातार भारी वर्षा नहीं होने का असर प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। अब तक मध्य प्रदेश में औसतन 404.2 मिमी (15.9 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 482 मिमी (19 इंच) वर्षा सामान्य मानी जाती है। इस प्रकार प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में औसतन 20 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। अनूपपुर से लेकर उमरिया तक कई जिलों में वर्षा की कमी 1 से 42 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है।
वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में भी सामान्य से लगभग 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है। भोपाल, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, धार, मंदसौर, उज्जैन, शिवपुरी और ग्वालियर सहित कई जिले अभी भी सामान्य वर्षा के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं।
कुछ जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा
प्रदेश के बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। खरगोन जिले का देजला-देवाड़ा जलाशय पूरी तरह भर चुका है, जिसके बाद स्पिलवे से पानी छोड़ा जा रहा है।
तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय, लेकिन असर सीमित
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के ऊपर दो चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और एक मानसूनी द्रोणिका (Monsoon Trough) सक्रिय हैं, लेकिन फिलहाल इनका प्रभाव मध्य प्रदेश पर नहीं पड़ रहा है। इसी कारण कई क्षेत्रों में धूप निकल रही है और केवल छिटपुट स्थानों पर हल्की वर्षा हो रही है।
6 अगस्त से फिर सक्रिय होगा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 6 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद मानसून को नई ऊर्जा मिलेगी। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश का दौर फिर शुरू हो सकता है।