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भारत की सुरक्षा चुनौतियों के बीच आधुनिक ड्रोन तकनीक पर बढ़ा फोकस,

आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब पारंपरिक जमीनी हथियारों के साथ-साथ मिसाइल और ड्रोन युद्ध की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया पश्चिम एशिया के संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में मानव रहित विमान (ड्रोन) निर्णायक भूमिका निभाएंगे।इसी परिप्रेक्ष्य में तुर्की का Bayraktar TB2 ड्रोन भारत की सुरक्षा के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। तुर्की द्वारा पाकिस्तान और बांग्लादेश को इस ड्रोन की आपूर्ति किए जाने के कारण भारत की सीमाओं पर निगरानी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश ने भारत की सीमा के निकट Bayraktar TB2 ड्रोन की तैनाती भी शुरू की है, जिससे सामरिक गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता बढ़ सकती है।हालांकि भारत ने कभी तुर्की से Bayraktar TB2 खरीदने की मांग नहीं की। दूसरी ओर, तुर्की की ड्रोन निर्माता कंपनी Baykar के CEO हलूक बायरकतार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कंपनी भारत को यह ड्रोन उपलब्ध नहीं कराएगी। इसका कारण तुर्की और पाकिस्तान के बीच मजबूत रक्षा संबंध बताए जाते हैं।ऐसी स्थिति में भारत के पास भी अत्याधुनिक ड्रोन क्षमता मौजूद है। भारतीय नौसेना वर्ष 2020 से अमेरिका से लीज पर लिए गए MQ-9B SeaGuardian ड्रोन का उपयोग समुद्री निगरानी के लिए कर रही है। इसके अलावा भारत अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने की योजना पर भी विचार कर रहा है, जिससे देश की निगरानी और रक्षा क्षमता में और मजबूती आने की उम्मीद है।दोनों ड्रोन में प्रमुख अंतरMQ-9B SeaGuardian (अमेरिका)विंगस्पैन: लगभग 20 मीटरअधिकतम टेक-ऑफ वजन: 4,700 किलोग्राम से अधिकअधिकतम गति: लगभग 482 किमी/घंटाउड़ान अवधि: 30 घंटे से अधिकपेलोड क्षमता: लगभग 1,700 किलोग्रामहेलफायर मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम और अन्य आधुनिक हथियार ले जाने में सक्षमअनुमानित कीमत: 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक प्रति यूनिटBayraktar TB2 (तुर्की)विंगस्पैन: 12 मीटरअधिकतम टेक-ऑफ वजन: लगभग 700 किलोग्रामगति: 130–222 किमी/घंटाउड़ान अवधि: लगभग 27 घंटेपेलोड क्षमता: लगभग 150 किलोग्रामMAM-L और MAM-C लेजर-गाइडेड माइक्रो म्यूनिशन से लैसअनुमानित कीमत: लगभग 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति यूनिटविशेषज्ञों के अनुसार, MQ-9B लंबी दूरी की निगरानी, भारी हथियार क्षमता और सैटेलाइट आधारित संचालन के कारण रणनीतिक स्तर का ड्रोन माना जाता है। वहीं Bayraktar TB2 अपेक्षाकृत कम लागत वाला, हल्का और सामरिक अभियानों के लिए प्रभावी प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग कई देशों ने विभिन्न संघर्षों में किया है।बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ड्रोन तकनीक अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह किसी भी देश की सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में भारत भी स्वदेशी और आधुनिक ड्रोन तकनीक के विकास के साथ अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

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