राजधानी भोपाल के रिहायशी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों तथा भवन उपयोग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में फिलहाल नगर निगम द्वारा किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विषय के सभी कानूनी, पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही आगे की नीति निर्धारित की जाएगी।बैठक में मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री भगवानदास सबनानी तथा नगरीय प्रशासन, नगर एवं ग्राम निवेश, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, भोपाल जिला प्रशासन एवं नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक में निर्णय लिया गया कि इस विषय के व्यापक अध्ययन के लिए अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति में नगरीय प्रशासन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, श्रम, पर्यावरण, नगर एवं ग्राम निवेश, प्रदूषण नियंत्रण मंडल तथा पंजीयन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य होंगे। भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

समिति रिहायशी क्षेत्रों में भवनों के उपयोग, व्यावसायिक गतिविधियों, पर्यावरणीय प्रभाव तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आगे की प्रक्रिया एवं नीति तय करेगी।बैठक में स्पष्ट किया गया कि समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने तथा नई प्रक्रिया निर्धारित होने तक भोपाल नगर निगम किसी भी भवन या व्यावसायिक प्रतिष्ठान के विरुद्ध सीलिंग जैसी कठोर कार्रवाई नहीं करेगा। इस निर्णय से उन व्यापारियों एवं भवन स्वामियों को फिलहाल राहत मिली है, जिनके विरुद्ध कार्रवाई की आशंका बनी हुई थी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में भोपाल नगर निगम ने हाल के दिनों में रिहायशी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक हजार से अधिक दुकानों एवं प्रतिष्ठानों को सील किया था। कई व्यापारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए स्वयं ही अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे, जबकि अनेक स्थानों पर नगर निगम द्वारा सीलिंग संबंधी नोटिस भी चस्पा किए गए थे। इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों द्वारा प्रदर्शन भी किए गए थे।राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों, पर्यावरण संरक्षण तथा व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए संतुलित एवं व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी पहलुओं का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा।