गाजा युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने इजरायल को सैन्य उपकरणों और हथियारों के पुर्जों की कम से कम 2,596 खेपें भेजी हैं। इस दावे के बाद भारत–इजरायल रक्षा सहयोग एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। इस दावे पर भारत सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा उत्पादन और निर्यात बढ़ाने की नीति पर लगातार काम कर रहा है। इसके तहत अनेक देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत किया गया है, जिनमें इजरायल भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदारों में शामिल है।भारत और इजरायल के रक्षा संबंधों की मजबूत नींव 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान और अधिक स्पष्ट हुई थी। उस समय भारत को तत्काल सैन्य साजो-सामान, विशेषकर प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों और गोला-बारूद की आवश्यकता थी। उस दौर में इजरायल ने भारत को आवश्यक रक्षा सामग्री उपलब्ध कराई, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिली।पिछले दो दशकों में भारत ने इजरायल से ड्रोन, मिसाइल रक्षा प्रणाली, एयरबोर्न अर्ली-वॉर्निंग प्लेटफॉर्म, सर्विलांस उपकरण, प्रिसिजन-गाइडेड हथियार और अन्य उन्नत रक्षा तकनीक प्राप्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग दोनों देशों के रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों की परिपक्वता को दर्शाता है।भारत–इजरायल संबंध केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नवाचार और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह रणनीतिक साझेदारी भारत की विदेश और रक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।