गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

डोल ग्यारस पर आस्था और संस्कृति के रंगों से सजा भोपाल, भव्य जुलूस में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब,

डोल ग्यारस के अवसर पर मंगलवार को भोपाल के पुराने शहर में आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। पीपल चौक स्थित जामा मस्जिद के पास से भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें भोपाल के राजा और दूल्हे राजा की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जुलूस में विभिन्न समाजों के डोल, झांकियां और कलाकारों के दल शामिल हुए।जुलूस के दौरान पुराने भोपाल की गलियां धार्मिक जयकारों, ढोल-नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की धुन से गूंजती रहीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी जुलूस को देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर मौजूद रहे। लोगों में धार्मिक उत्साह के साथ अपनी पारंपरिक संस्कृति से जुड़ने का भाव भी दिखाई दिया।

सबसे आगे रही भोपाल के राजा की प्रतिमा

जुलूस में सबसे आगे भोपाल के राजा की प्रतिमा रही। इसके पीछे अलग-अलग समाजों के डोल, आकर्षक झांकियां और कलाकारों के दल चलते रहे। दूल्हे राजा की प्रतिमा भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।जुलूस में धार्मिक और ऐतिहासिक पात्रों का रूप धारण किए कलाकारों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। कोई नीम करोली बाबा, तो कोई अहिल्याबाई होल्कर और महात्मा गांधी के रूप में नजर आया। कलाकारों ने रास्ते में विभिन्न प्रकार के करतब और वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियां देकर माहौल को और जीवंत बना दिया।

परंपरा के साथ लोक संस्कृति की झलक

जुलूस में दुल-दुल घोड़ी नृत्य और कलाकारों के करतब विशेष आकर्षण रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लोगों ने झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को उत्साह के साथ देखा।डोल ग्यारस का यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें भोपाल की लोक परंपरा, सामाजिक भागीदारी और सांस्कृतिक विरासत की भी झलक देखने को मिली। अलग-अलग समाजों की भागीदारी ने जुलूस को विविध रंगों से भर दिया।

पुराने शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा जुलूस

जामा मस्जिद के पास से रवाना हुआ जुलूस पीरगेट की ओर बढ़ा। इसके बाद चौक बाजार, लखेरापुरा, भवानी मंदिर, पीरगेट, सेफिया कॉलेज रोड, इमामबाड़ा चौकी, जनकपुरी पानी की टंकी, जुमेराती गेट, सराफा चौक, इब्राहिमपुरा, रंजन पेन कॉर्नर, सुल्तानिया रोड, बुधवारा, तलैया काली मंदिर, लिली टॉकीज चौराहा और पुलिस मुख्यालय तिराहे से होते हुए खटलापुरा मंदिर पहुंचा।जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक जयकारे लगाए और जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। शाम करीब सात बजे खटलापुरा मंदिर में जुलूस का समापन हुआ।

सुरक्षा और यातायात की रही व्यवस्था

बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई। जुलूस के मार्ग पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे, ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो।डोल ग्यारस का यह आयोजन भोपाल के पुराने शहर में आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत संगम के रूप में सामने आया, जहां श्रद्धालुओं के साथ शहरवासियों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

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