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मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार, 11 नए औद्योगिक पार्कों का प्रस्ताव,

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) की तीसरी एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की बैठक में मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर राज्य सरकार का विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और केंद्र-राज्य के सहयोग से विकसित की जा रही औद्योगिक परियोजनाओं की जानकारी साझा की।मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। इसके लिए आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश-अनुकूल नीतियों और प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उद्योगों को बेहतर माहौल मिले और प्रदेश में नए निवेश के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें।

9 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित होंगे औद्योगिक पार्क

भारत सरकार की BHAVYA योजना के तहत मध्यप्रदेश ने पहले चरण के राउंड-I में 11 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। इन परियोजनाओं के लिए कुल 9,047.08 एकड़ भूमि प्रस्तावित है, जबकि इनकी कुल DPR लागत करीब 8,144.35 करोड़ रुपये है।प्रस्तावित औद्योगिक पार्क उज्जैन, धार, देवास-शाजापुर, रतलाम, सीहोर, सागर, गुना, ग्वालियर, जबलपुर, कटनी और रीवा सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विकसित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य राज्य में औद्योगिक विकास को क्षेत्रीय स्तर पर संतुलित करना और अधिक से अधिक क्षेत्रों में निवेश के अवसर पैदा करना है।धार के भेंसोला औद्योगिक पार्क को टेक्सटाइल पार्क के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यह भारत के बड़े PM MITRA पार्क का विस्तार होगा और वस्त्र क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को बढ़ावा देने में मदद करेगा। अन्य पार्कों में फार्मा, ऑटोमोबाइल, रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण, सेमीकंडक्टर, IT और ITeS जैसे क्षेत्रों के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दे रही है। प्रस्तावित व्यवस्थाओं में डे-केयर सेंटर, CCTV आधारित सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, कैंटीन और आवश्यक सुविधाओं से युक्त हॉस्टल शामिल हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है।बैठक में प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक कॉरिडोर और विभिन्न औद्योगिक नोड्स पर भी चर्चा हुई। केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियों के जरिए इन परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।बैठक में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक कुमार लाहिड़ी सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।मध्यप्रदेश की ओर से प्रस्तुत विजन में निवेश, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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