गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

वीरांगना महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित,

गोंडवाना साम्राज्य की महान वीरांगना महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में आदिवासी समाज द्वारा श्रद्धांजलि सभाओं एवं स्मरण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने महारानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकारों तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी वीरांगना महारानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी वीरता, पराक्रम एवं बलिदान को मध्यप्रदेश का गौरव बताया। वहीं मंडला गढ़ में आयोजित कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महारानी दुर्गावती के शौर्य का स्मरण करते हुए आदिवासी समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों, अन्याय, अत्याचार एवं विस्थापन जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की तथा सामाजिक एकता को मजबूत बनाने का आह्वान किया।प्रदेश के गांव-गांव और घर-घर में आदिवासी समाज द्वारा महारानी दुर्गावती के बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों, संघर्षों और पराक्रम को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। युवाओं से उनके जीवन मूल्यों को अपनाने और समाज के उत्थान में योगदान देने की अपील की गई।सिवनी जिले के लखनादौन तहसील मुख्यालय में भी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रांतीय धर्माचार्य दादा प्रेम शाह सल्लाम ने प्राकृतिक संतुलन एवं सामाजिक एकता पर बल दिया। दादा बीरसिंह उइके (धूनीवाले, घोघरी-सहसना) ने सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश संगठक एडवोकेट झनकू लाल कुमरे ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाज से संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, सामाजिक एकता तथा क्रांतिकारी वीर अमर शहीदों के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, इतिहास और अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना समय की आवश्यकता है।राष्ट्रीय विधि सलाहकार अधिवक्ता देव सिंह कुमरे (सर्व आदिवासी समाज, भारत) ने समाज से जातिवाद, पार्टीवाद, क्षेत्रवाद और धर्मवाद से ऊपर उठकर मानवता, एकता और भाईचारे की भावना को सशक्त करने का आग्रह किया। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र एवं संविधान में निहित अधिकारों की रक्षा के लिए एसटी, एससी, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक समाज के बीच सामाजिक समन्वय एवं एकजुटता पर बल दिया।कार्यक्रम में बेनी सल्लाम सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने युवाओं से शिक्षित, रोजगारोन्मुख, संघर्षशील एवं समाजहितैषी बनने का आह्वान किया।

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