
मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। निम्न दबाव क्षेत्र और मानसून की द्रोणिका के प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के दौरान कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ स्थानों पर 4 इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना भी जताई गई है।मौसम के सक्रिय सिस्टम का सबसे अधिक असर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में देखने को मिल सकता है। रविवार को जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, कटनी, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, रायसेन और नर्मदापुरम में तेज बारिश के आसार हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश के अलावा भोपाल तथा ग्वालियर-चंबल संभाग के कुछ हिस्सों में भी मौसम प्रभावित रहेगामौसम विभाग के अनुसार 16 से 18 अगस्त के बीच पूर्वी मध्य प्रदेश सहित प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 544.4 मिलीमीटर यानी करीब 21.4 इंच बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि तक सामान्य बारिश लगभग 24.4 इंच होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक करीब 3 इंच बारिश कम हुई है और कुल बारिश सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम है।मध्य प्रदेश में बारिश की कमी लगभग 18 प्रतिशत, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह कमी करीब 6 प्रतिशत है। प्रदेश के 43 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।पूर्वी मध्य प्रदेश के बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इन जिलों में बारिश की कमी करीब 2 से 54 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, बैतूल, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
जून की कमी अब भी बरकरार
इस मानसून सीजन की शुरुआत में जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार आया और जुलाई का बारिश कोटा पूरा हो गया। हालांकि, इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आने से कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं।अब अगस्त में एक बार फिर मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय होने से पूर्वी जिलों में बारिश का दौर तेज हुआ है। इसके बावजूद जून में हुई बारिश की कमी अभी पूरी नहीं हो सकी है।मध्य प्रदेश में पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 37.3 इंच है। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे जिलों में सामान्य मानसूनी बारिश लगभग 38 से 39 इंच के आसपास रहती है।
किसानों और आम लोगों के लिए राहत के साथ सतर्कता जरूरी
सतर्कता
पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी के बीच मानसून की सक्रियता किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है। हालांकि, जहां तेज बारिश की संभावना है, वहां जलभराव, नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर और आवागमन प्रभावित होने जैसी परिस्थितियों को लेकर सावधानी जरूरी है। लोगों से मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखने और अत्यधिक बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से नदी-नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की गई है।