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भोपाल के प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में हवन-पूजन और महाआरती का भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं ने मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद,

भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में जुलाई माह के प्रथम शनिवार को श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में आचार्य रत्नेश शास्त्री के सान्निध्य में विधि-विधान के साथ हवन, विशेष पूजन एवं महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और संकल्प के साथ हुआ। आचार्य पंडित गजेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाते हुए हवन की शुरुआत कराई। यज्ञ कुंड में वैदिक परंपरा के अनुसार घी, शहद, नवधान्य और अन्य पूजन सामग्री की आहुति दी गई। हवन के दौरान गूंजते वैदिक मंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव से यज्ञ में भाग लेते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना की।हवन के उपरांत आचार्य रत्नेश शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को शनिदेव की महिमा और ज्योतिषीय दृष्टि से शनि ग्रह के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शनि केवल न्याय के देवता ही नहीं, बल्कि कर्म के अनुसार फल प्रदान करने वाले ग्रह भी हैं। उन्होंने बताया कि सच्चे मन से की गई पूजा, संयमित जीवन, सत्कर्म और जरूरतमंदों की सेवा से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित पूजा-पाठ, दान-पुण्य और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।आचार्य ने यह भी कहा कि व्यक्ति के जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना धैर्य, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ करना चाहिए। उन्होंने बताया कि शनिदेव व्यक्ति को कर्म के प्रति सजग रहने और जीवन में अनुशासन अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उनके संदेश को श्रद्धालुओं ने गंभीरता से सुना और जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।दोपहर में आयोजित महाआरती कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और भजन-कीर्तन के बीच जब सामूहिक आरती हुई तो पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आरती में भाग लिया तथा शनिदेव के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया, जिसे सभी ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों की सहभागिता देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने मंदिर समिति और आयोजन से जुड़े सभी लोगों की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। कई श्रद्धालुओं ने नियमित रूप से इस प्रकार के आयोजनों में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की।मंदिर समिति ने बताया कि धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को आगे भी निरंतर आयोजित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ सकें। समिति ने सभी श्रद्धालुओं का सहयोग और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से आयोजित करने का भरोसा दिलाया।पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुए इस धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था, संस्कार और सामूहिक धार्मिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का सशक्त माध्यम हैं।

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