गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

निराले अंदाज की हस्त-शिल्प चित्रकला में माहिर भोपाल की बेटी मनीषा भूरिया को अब तक नहीं मिला उचित मंच।

चित्रकला में निपुण मनीषा अपनी पेंटिंग्स के जरिए प्राचीन संस्कृति और स्थानीय धरोहरों को कैनवास पर जीवंत कर देती हैं;

हर रचना में एक अलग कहानी और समाज को संदेश छिपा होता है। मध्य प्रदेश की समृद्ध लोककला और इतिहास को आधुनिक दृष्टि से प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हुए भी मनीषा को सार्वजनिक प्रदर्शन, प्रदर्शनियों या बाजार तक पहुंचने के अवसर नहीं मिले। सही मार्गदर्शन और मंच की कमी के कारण वह आज अधिकांश समय बंद कमरे में काम करने को विवश हैं, जबकि उनके पास कला को आगे बढ़ाने और युवाओं को प्रेरित करने की पूरी क्षमता है।

मनीषा की गुहार सरकार और संबंधित सांस्कृतिक संस्थानों से है कि उन्हें उचित प्लेटफार्म, प्रदर्शनियों में स्थान और प्रचार-प्रसार के साधन उपलब्ध कराए जाएं। स्थानीय कला मेलों, शिल्प बाजारों, सरकारी कलात्मक छात्रवृत्तियों तथा दीर्घाओं के माध्यम से उन्हें सार्वजनिक पहचान दिए जाने की आवश्यकता है।

इससे न केवल मनीषा का करियर सहेजने में मदद मिलेगी, बल्कि भोपाल की पारंपरिक कलाओं को भी नया जीवन मिलेगा। कलाकारों के लिए बनाई गई योजनाओं का लागू होना और क्षेत्रीय कलाकारों तक सरल पहुँच सुनिश्चित करना समय की मांग है।

मनीषा का कहना है कि सही सहयोग मिला तो वह अपनी कला को बड़े स्तर पर पेश कर समाज और संस्कृति को जोड़ने का काम कर सकती हैं।

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