भारत के पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक कंवल सिब्बल का मानना है कि दक्षिण एशिया में भारत से दूरी बनाना अमेरिका की एक रणनीतिक भूल साबित हो सकती है। उनका कहना है कि चीन जैसी उभरती वैश्विक शक्ति का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए अमेरिका को अंततः भारत के सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी।कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि अमेरिका और चीन के बीच वास्तविक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में केंद्रित है, जहां अमेरिका के प्रमुख सैन्य अड्डे और सुरक्षा हित मौजूद हैं। इसी क्षेत्र में चीन लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी मौजूद हैं।उन्होंने कहा कि इसके विपरीत भारतीय उपमहाद्वीप में अमेरिका की कोई प्रत्यक्ष सुरक्षा जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में भारत लंबे समय से अपने दम पर चीन की चुनौतियों का सामना करता आया है। उनका आरोप है कि ‘इंडो-पैसिफिक’ रणनीति के तहत भारत की क्षेत्रीय भूमिका को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया, जिससे इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव पर अमेरिका का ध्यान कमजोर पड़ा।कंवल सिब्बल ने पाकिस्तान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका ने चीन को पाकिस्तान में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अमेरिका ने कभी प्रभावी विरोध नहीं किया। साथ ही, जिस प्रकार अमेरिका भारत के रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा संबंधों पर सवाल उठाता है, उसी तरह वह पाकिस्तान और चीन के रक्षा सहयोग पर सख्त रुख नहीं अपनाता।उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर चीन के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर न तो आर्थिक दबाव बनाया और न ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से कोई प्रभावी रणनीति अपनाई।अपने बयान के अंत में कंवल सिब्बल ने कहा कि भारत के बिना अमेरिका दक्षिण एशिया में चीन का प्रभावी मुकाबला नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां भारत को अमेरिका से दूर करने वाली प्रतीत होती हैं। उनके अनुसार, फ्रांस में आयोजित G7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ‘G-2’ जैसी अवधारणाओं का उल्लेख भी इसी दिशा का संकेत माना जा सकता है।विदेश मामलों के जानकारों का मानना है कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंध भविष्य में भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।