मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। अभियान के अंतर्गत अब तक रिकॉर्ड 2,00,844 जल संरचनाओं का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है।जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के तहत राज्य में कुल 3,67,777 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इनमें से 2,00,844 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 1,51,093 कार्य प्रगति पर हैं। अभियान के सफल संचालन के लिए 10,644.02 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से अब तक 6,330.81 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए 57,794 खेत तालाब तथा 91,838 डग वेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है। इसके अतिरिक्त 29,906 जल संरक्षण एवं पुनर्भरण संरचनाएं तथा 126 अमृत सरोवर पूर्ण किए जा चुके हैं। सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,152 सिंचाई अधोसंरचना परियोजनाएं और 2,721 मरम्मत एवं रखरखाव कार्य भी पूर्ण हुए हैं।अभियान के अंतर्गत सामाजिक और पर्यावरणीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। वाटरशेड प्रबंधन के तहत 4,822 कार्य पूरे किए गए हैं, जिससे भूजल स्तर में सुधार की संभावना बढ़ी है। वहीं, ‘WoW मोबाइल ऐप’ के माध्यम से 5,275 पानी की टंकियों की सफाई कर स्कूलों में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है।जल संसद जल बंधन 2.0′ पहल के अंतर्गत 21.23 लाख से अधिक कार्यों का पंजीकरण हुआ है तथा 91.3 प्रतिशत कार्य समय पर पूर्ण किए गए हैं, जो जनसहभागिता और प्रशासनिक दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश की जागरूक जनता, जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अमले को देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से सुरक्षित रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में निरंतर नवाचार एवं प्रयास जारी रहेंगे।