अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए लगभग 40 दिनों के सैन्य हमलों के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कोई निर्णायक या स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा है। एजेंसियों का कहना है कि ईरान की परमाणु क्षमताओं को लेकर उनकी समझ में पिछले वर्ष की गर्मियों के बाद से कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।जून 2025 में ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों—नतान्ज, फोर्डो और इस्फहान—पर हुए हमलों के बाद यह अनुमान लगाया गया था कि ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने की समय-सीमा को लगभग 9 महीने से एक वर्ष तक पीछे धकेला गया है। इससे पहले आकलन था कि ईरान 3 से 6 महीनों के भीतर परमाणु बम तैयार करने की स्थिति में पहुंच सकता है।, ताज़ा जानकारी के मुताबिक इन हमलों के बाद भी ईरान के पास मौजूद 60 प्रतिशत समृद्ध लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम का पूरा हिसाब स्पष्ट नहीं हो पाया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस भंडार का एक बड़ा हिस्सा इस्फहान स्थित एक भूमिगत सुविधा में सुरक्षित हो सकता है।इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई को “एक बड़े वैश्विक खतरे को रोकने के लिए आवश्यक” बताया।ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह अभियान ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अब तक की कार्रवाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमित प्रभाव ही पड़ा है।