देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल ट्राइडेंट ग्रुप ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसके संस्थापक एवं राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के राजनीतिक दल परिवर्तन के तुरंत बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) द्वारा फैक्ट्री के खिलाफ असामान्य और कथित रूप से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई।याचिका में कंपनी ने अदालत को बताया कि वर्ष 1990 में स्थापित यह समूह एक सूचीबद्ध प्रतिष्ठान है, जिसमें लगभग 15 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं और जो सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करता रहा है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थापक राजेंद्र गुप्ता वर्तमान में सक्रिय प्रबंधन से अलग हैं और चेयरमैन एमेरिटस की भूमिका में हैं। 24 अप्रैल 2026 को उनके राजनीतिक पाला बदलने के बाद कंपनी प्रबंधन, अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित रूप से धमकियां मिलने लगीं।कंपनी ने न्यायालय को सूचित किया कि 25 अप्रैल को इस संबंध में केंद्र सरकार के गृह सचिव को सुरक्षा की मांग को लेकर पत्र भी भेजा गया था। याचिका के अनुसार, गुरुवार शाम लगभग 7:30 बजे पीपीसीबी की लगभग 30 सदस्यीय टीम ने फैक्ट्री परिसर में पहुंचकर ‘छापामार शैली’ में कार्रवाई की। कंपनी का आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों की आवाजाही सीमित की गई तथा नमूना संग्रह की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि नियमों के अनुसार लिए गए नमूनों की एक प्रति उद्योग को प्रदान करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस प्रावधान का पालन नहीं किया गया। कंपनी ने अदालत से अनुरोध किया कि ताजा नमूनों की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा राज्य से बाहर कराई जाए, क्योंकि उसे राज्य तंत्र की निष्पक्षता पर संदेह है। साथ ही, किसी भी कठोर कार्रवाई से पूर्व नोटिस और सुनवाई का अवसर देने की मांग भी की गई।

दूसरी ओर, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अदालत में प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि यह कार्रवाई केवल एक नियमित निरीक्षण का हिस्सा थी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन बंदी जैसी कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है और याचिका आशंकाओं पर आधारित है। बोर्ड ने अदालत को आश्वस्त किया कि सोमवार तक कंपनी के विरुद्ध कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पीपीसीबी के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए कंपनी के खिलाफ 4 मई तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय ने मामले में औपचारिक नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की है।सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि कंपनी द्वारा उठाई गई आशंकाएं तथ्यों से पुष्ट होती हैं, तो मामले में प्रशासनिक प्रक्रिया और निष्पक्षता दोनों की गहन न्यायिक जांच की जा सकती है।