अजीत डोभाल की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा को लेकर पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और हलकों द्वारा भ्रामक एवं आधारहीन दावे किए गए हैं। विशेष रूप से अबसार आलम द्वारा इस यात्रा को बलूचिस्तान से जोड़कर साजिश का रूप देने की कोशिश की गई है, जो तथ्यों से परे है।पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि भारत बलूचिस्तान में अस्थिरता फैलाने में भूमिका निभा रहा है, जबकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। अबसार आलम ने यह दावा किया कि जब पाकिस्तान बलूचिस्तान के माध्यम से ईरान और मध्य एशिया के लिए व्यापारिक मार्ग विकसित कर रहा है, तब डोभाल की अबू धाबी यात्रा किसी साजिश का हिस्सा हो सकती है।इन दावों का खंडन करते हुए बलूच कार्यकर्ता किया बलूच ने स्पष्ट कहा है कि बलूचिस्तान का उपयोग साजिश की थ्योरी फैलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जिस उच्चस्तरीय बैठक की चर्चा हो रही है, उसकी जानकारी स्वयं यूएई स्थित भारतीय दूतावास द्वारा सार्वजनिक की गई थी और इसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी व्यापक रूप से कवर किया गया था।अतिरिक्त, यह तर्क भी दिया गया कि कोई भी सरकार किसी अन्य देश के खिलाफ साजिश रचते समय उच्चस्तरीय बैठकों की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं करती। यह एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है कि इस प्रकार की बैठकों की जानकारी पारदर्शिता के तहत साझा की जाती है।गौरतलब है कि अजीत डोभाल ने इससे पहले सऊदी अरब के वरिष्ठ नेताओं—विदेश मंत्री, ऊर्जा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार—से भी मुलाकात की थी, जिन्हें किसी भी प्रकार के विवाद या साजिश से नहीं जोड़ा गया।अतः यह स्पष्ट है कि यूएई यात्रा को बलूचिस्तान से जोड़ना एक निराधार और भ्रामक प्रचार है, जिसका उद्देश्य तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीतिक गतिविधियों को इस प्रकार की साजिशी व्याख्याओं से जोड़ना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी हानिकारक है।