भोपाल। सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर मध्यप्रदेश के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों का विरोध अब तेज होता नजर आ रहा है। अपनी मांगों को लेकर मध्यप्रदेश प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने राजधानी भोपाल में मंत्रालय (वल्लभ भवन) के गेट क्रमांक-4 और सतपुड़ा भवन के सामने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने सामूहिक मुंडन कराकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया।कर्मचारी संघ का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति के माध्यम से सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्त कर्मचारियों के लिए सीपीसीटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता परेशानी का कारण बन रही है। संघ के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 26 मई 2026 को जारी पत्र क्रमांक 1/1/0002/2026-GAD-3-01 में 40 वर्ष की आयु पूरी करने पर सीपीसीटी परीक्षा से छूट से संबंधित स्पष्टीकरण के बाद कई कर्मचारियों के सामने नौकरी बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों की अपनी दलील

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य दिवंगत शासकीय कर्मचारी के परिवार को आर्थिक सहारा देना है। ऐसे में नियुक्ति के बाद सीपीसीटी परीक्षा पास नहीं कर पाने के कारण सेवा समाप्त होना उनके परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकता है।संघ का दावा है कि इनमें कई कर्मचारी 12वीं पास हैं और कार्यालयों में लंबे समय से बजट, ऑडिट, सीएम हेल्पलाइन, डेटाबेस सिस्टम सहित विभिन्न विभागीय कार्यों को जिम्मेदारी के साथ संभाल रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें उनकी वास्तविक कार्यक्षमता के आधार पर अवसर दिया जाना चाहिए और परीक्षा में असफल होने को सीधे सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
कर्मचारियों ने रखीं ये प्रमुख मांगें

कर्मचारी संघ ने शासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें अनुकंपा नियुक्त सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों के लिए तीन महीने का विशेष प्रशिक्षण देकर विभागीय परीक्षा आयोजित करना प्रमुख मांग है।इसके अलावा संघ ने सीपीसीटी की कंडिका 6.5 के तहत सेवा से पृथक करने के प्रावधान को समाप्त करने, सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण पहले सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को वापस नियुक्त करने और 40 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले कर्मचारियों को सीपीसीटी की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की है।
शासन को सौंपा ज्ञापन
धरना प्रदर्शन के बाद कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने शासन के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूर्व में लागू नियमों को यथावत रखने और अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों के हित में सहानुभूतिपूर्वक एवं न्यायसंगत निर्णय लेने की मांग की गई।कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपनी नौकरी और परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपनी बात शासन तक पहुंचा रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।