प्रदेश के हजारों युवाओं का इंजीनियर बनने का सपना इस वर्ष भी उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है, लेकिन पहले चरण की काउंसलिंग में अब तक उपलब्ध सीटों की तुलना में आधे से भी कम विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। ऐसे में शिक्षा जगत में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर युवाओं का रुझान इंजीनियरिंग से क्यों घट रहा है।प्रदेश के 125 इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल 67,037 सीटें उपलब्ध हैं, जबकि पहले चरण में अब तक केवल 31,247 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से भी 21,777 विद्यार्थियों ने अपनी पसंद (चॉइस फिलिंग) दर्ज की है। तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने चॉइस फिलिंग की अंतिम तिथि 28 जून रात 11:45 बजे निर्धारित की है। पहले चरण में प्रवेश जेईई रैंक के आधार पर दिए जाएंगे और सीट आवंटन 3 जुलाई को किया जाएगा।दूसरी ओर, ऐसे विद्यार्थियों के लिए भी अवसर खुला है जिन्होंने जेईई नहीं दिया है। दूसरे चरण में 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश दिए जाएंगे, जिसके लिए अब तक 7,055 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है।जहां इंजीनियरिंग में अपेक्षाकृत कम उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं डिप्लोमा इंजीनियरिंग में विद्यार्थियों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली है। दूसरे चरण तक 24 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। बीसीए और बीबीए जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश प्रक्रिया जारी है, हालांकि यहां भी सीटों की तुलना में आवेदन कम हैं।इस बीच प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति ने अगले तीन वर्षों के लिए विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस तय कर दी है। इंजीनियरिंग की वार्षिक फीस 40 हजार रुपये, डिप्लोमा इंजीनियरिंग 30 हजार रुपये, फार्मेसी 62 हजार रुपये तथा एमटेक 60 हजार रुपये निर्धारित की गई है। बीएड के लिए फिलहाल 32 हजार रुपये की अस्थायी फीस लागू की गई है, जिसे दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संशोधित किया जा सकता है।बदलते रोजगार परिदृश्य, नई तकनीकों और करियर के विविध विकल्पों के कारण विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में अंतिम दिन चॉइस फिलिंग करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह फैसला उनके भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।