अमेरिकी नौसेना द्वारा 13 अप्रैल से शुरू की गई नाकेबंदी का ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई से ईरान को अब तक 6 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हो चुका है। पहले से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे ईरान के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन होती जा रही है।होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी उथल-पुथल देखने को मिली है। तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जबकि सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के निर्यात पर भी असर पड़ा है।, नाकेबंदी से पहले ईरान अपने तेल निर्यात को बनाए रखने में सफल रहा था और उसे बढ़ती कीमतों का लाभ भी मिल रहा था। हालांकि, अप्रैल के मध्य में अमेरिकी कार्रवाई शुरू होने के बाद हालात तेजी से बदल गए।ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होता है। शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, नाकेबंदी के चलते ईरान की विदेशों में कच्चा तेल बेचने की क्षमता में भारी गिरावट आई है, विशेष रूप से चीन को होने वाले निर्यात में, जो उसका सबसे बड़ा ग्राहक माना जाता है।ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, मई में ईरान का कच्चा तेल और कंडेनसेट निर्यात लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन (BPD) से घटकर 3 लाख BPD से भी कम रह गया। तुलना के लिए नाकेबंदी शुरू होने से पहले के 40 दिनों के आंकड़ों का उपयोग किया गया है।कच्चे तेल की औसत कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल मानने पर, वर्तमान निर्यात स्तर से ईरान को प्रतिदिन लगभग 27 मिलियन डॉलर और पूरे मई माह में लगभग 837 मिलियन डॉलर की आय होने का अनुमान है। इसके विपरीत मार्च में, जब निर्यात औसतन 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन था, तब देश को प्रतिदिन लगभग 165.6 मिलियन डॉलर तथा पूरे महीने में करीब 5.13 अरब डॉलर की आय हो रही थी।अप्रैल में निर्यात औसतन 13.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जिससे प्रतिदिन लगभग 120.6 मिलियन डॉलर और पूरे महीने में करीब 3.62 अरब डॉलर की कमाई हुई थी।कि तेल निर्यात में आई इस बड़ी गिरावट के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठने लगा है कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान लंबे समय तक इस संघर्ष और आर्थिक दबाव को कितना झेल पाएगा।इस बीच तेहरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसे “गैर-कानूनी नाकेबंदी” करार दिया है। ईरानी अधिकारियों ने अपने बंदरगाहों के आसपास अमेरिकी जहाजों की गतिविधियों को “समुद्री डकैती” की संज्ञा दी है और इसका विरोध जारी रखा है।