
62,500 प्रतिष्ठानों का रिकॉर्ड अहम, नगर निगम की कार्रवाई और रहवासियों की आपत्तियों पर कोर्ट में होगी आगे सुनवाई
भोपाल, 15 सितंबर 2026। भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी। संबंधित न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण मामले की सुनवाई टल गई है। अब अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय की जाएगी।
इस मामले में भोपाल नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज करीब 62 हजार 500 व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अब तक की गई कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नगर निगम की ओर से अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। वहीं, रहवासियों की ओर से निगम की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए दस्तावेज और आपत्तियां भी कोर्ट के समक्ष रखी गई हैं।
5 अगस्त के आदेश के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
नगर निगम की ओर से करीब 15 दिनों तक नोटिस जारी किए गए। निगम के रिकॉर्ड में सूचीबद्ध करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए। इसके बाद तीन दिनों तक कार्रवाई करते हुए 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया गया था।
व्यापारियों के विरोध के बाद रुकी सीलिंग
नगर निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में शहर के व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम की कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई। बताया जा रहा है कि करीब 15 दिनों से प्रतिष्ठानों की सीलिंग और बंद करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। माना जा रहा है कि कोर्ट नगर निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट और रहवासियों की ओर से प्रस्तुत आपत्तियों एवं दस्तावेजों पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश दे सकता है।
अरेरा कॉलोनी के व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी सवालों के घेरे में
रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अरेरा कॉलोनी के कई बड़े मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का मामला भी चर्चा में है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के कारण सड़कों पर ट्रैफिक, भीड़ और शोर बढ़ रहा है।
रहवासियों का तर्क है कि इससे क्षेत्र की सामान्य शांति और सुरक्षा प्रभावित हो रही है। खासतौर पर स्कूली बच्चों की आवाजाही वाले इलाकों में बढ़ता यातायात दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ा सकता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। ऐसे में नगर निगम की कार्रवाई आगे किस दिशा में बढ़ेगी और रहवासी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर कोर्ट क्या निर्देश देता है, इस पर भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों दोनों की नजर बनी हुई है।