भारत की उत्तरी सीमाओं के निकट चीन द्वारा जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमानों की तैनाती और पाकिस्तान द्वारा चीन से जे-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की संभावित योजना ने भारतीय वायु सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे समय में भारतीय वायुसेना की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।भारत का स्वदेशी एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना अगले दशक में परिचालन के लिए तैयार होने की उम्मीद है। तब तक भारतीय वायुसेना एक अंतरिम समाधान के रूप में रूस के सुखोई-57 (Su-57) स्टील्थ लड़ाकू विमान पर विचार कर रही है।, पिछले 6 से 8 महीनों के दौरान भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के बीच 80 से 100 सुखोई-57 विमान खरीदने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है।रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यदि भारत रूस के स्थानीय उत्पादन के प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) नासिक, कोरापुट और कासरगोड स्थित अपनी इकाइयों के माध्यम से इन विमानों के उत्पादन के लिए तैयार है। इससे भारतीय वायुसेना के मौजूदा लगभग 270 सुखोई-30MKI विमानों के साथ रखरखाव और लॉजिस्टिक्स में भी सुविधा मिल सकती है।दूसरी ओर, हाल ही में अमेरिकी सीनेट द्वारा रूस से रक्षा उपकरण या ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित आर्थिक प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक पारित किए जाने के बाद भारत के सामने रणनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। यदि यह विधेयक आगे चलकर कानून का रूप लेता है और उसके प्रावधान लागू होते हैं, तो रूस से बड़े रक्षा सौदों पर भारत को संभावित अमेरिकी कार्रवाई या शुल्क संबंधी दबाव का सामना करना पड़ सकता है। भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, दीर्घकालिक रणनीतिक हितों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा। अंतिम निर्णय भारत सरकार द्वारा सुरक्षा, तकनीकी, आर्थिक और विदेश नीति से जुड़े सभी पहलुओं के व्यापक मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा।