गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

“मैं पुत्र सीवन” अभियान बना जनआंदोलन, सिवन नदी के जीर्णोद्धार में बढ़ रहा जनसहयोग,

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित सिद्धपुर नगर में बहने वाली पवित्र सिवन नदी के संरक्षण और जीर्णोद्धार को लेकर शुरू किया गया “मैं पुत्र सीवन” अभियान अब जनआंदोलन का स्वरूप लेता जा रहा है। वर्षों से क्षेत्रवासियों को जीवनदायिनी जल प्रदान करने वाली इस नदी को पुनः स्वच्छ और पवित्र बनाने के उद्देश्य से समाजसेवी प्रदीप चावढ़ा एवं उनके सहयोगियों द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान लगातार लोगों का समर्थन प्राप्त कर रहा है।सिवन नदी को स्थानीय लोग “जीवनदायिनी मां सीवन” के नाम से जानते हैं। अनंत काल से यह नदी आसपास के गांवों और सिद्धपुर नगर के लोगों की जल आवश्यकताओं को पूरा करती आ रही है। लेकिन समय के साथ नदी में गंदगी, जलकुंभी और प्रदूषण बढ़ने से इसकी स्थिति चिंताजनक हो गई थी। इसी स्थिति को बदलने के संकल्प के साथ युवा समाजसेवी प्रदीप चावढ़ा ने अपने साथियों के साथ मिलकर नदी के जीर्णोद्धार का अभियान शुरू किया।

अभियान के शुरुआती दिनों में केवल कुछ मजदूर और स्वयंसेवक ही इस कार्य में जुटे थे। जब दैनिक गोंडवाना समाचार पत्र की टीम ने अभियान स्थल का दौरा किया, उस समय कुछ सिवन योद्धा मानव मशीन बनकर नदी की सफाई में जुटे हुए थे। लेकिन आज लगभग एक माह बाद यह अभियान लगातार व्यापक स्वरूप ग्रहण करता दिखाई दे रहा है।अभियान के सूत्रधार प्रदीप चावढ़ा ने चर्चा के दौरान बताया कि “मैं पुत्र सीवन” एवं “मैं पुत्री सीवन” अभियान के माध्यम से समाज के हर वर्ग को नदी संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान से अब तक हजारों लोग जुड़ चुके हैं तथा 5000 सिवन पुत्र एवं पुत्रियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।उन्होंने कहा कि इस पुनीत कार्य में समाजसेवी संगठन, स्वयंसेवी संगठन, व्यापारिक संगठन, राजनीतिक संगठन, महिला मंडल, नगर पालिका प्रशासन तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। अभियान को आगे बढ़ाने में भाई विवेक राठौर बजरंग दल सीहोर, विधायक श्री सुदेश राय, श्रीमती अरुणा सुदेश राय, नगर पालिका अध्यक्ष भाई प्रिंस राठौर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों की सक्रिय भूमिका रही है। साथ ही प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का सहयोग भी अभियान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

प्रदीप चावढ़ा ने बताया कि एक समय ऐसा था जब सिवन नदी का जल न तो पवित्र रह गया था और न ही उपयोग के योग्य था। लेकिन अब नदी को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के प्रारंभ में जहां केवल दो मजदूरों के साथ सफाई कार्य शुरू हुआ था, वहीं अब नदी की सफाई में आधुनिक मशीनों का भी उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में जेसीबी मशीनें, पोकलैंड मशीनें एवं डंपर नदी से जलकुंभी और गाद हटाने के कार्य में लगातार लगे हुए हैं।अभियान हनुमान फाटक धाम से प्रारंभ किया गया था और प्रतिदिन सफाई कार्य का दायरा बढ़ता जा रहा है। नदी के किनारों पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और युवा स्वयंसेवक श्रमदान कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और जल जागरूकता का सकारात्मक संदेश फैल रहा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल नदी सफाई अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। लोगों को उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों से सिवन नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौटेगी और क्षेत्रवासियों के लिए स्वच्छ एवं पवित्र जल का स्रोत बनेगी।

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