
मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम में बड़े तालाब स्थित क्रूज को फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के रूप में विकसित करने के लिए की गई सामग्री सप्लाई में 80 लाख 81 हजार रुपये के गबन का मामला सामने आया है। यह गंभीर अनियमितता पर्यटन विभाग के मुख्य महाप्रबंधक (वित्त) श्री राजेश गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान उजागर की, जिसके बाद मामले की जांच भोपाल क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।क्राइम ब्रांच द्वारा की गई विस्तृत पड़ताल में निगम की विंड एंड वेव्स इकाई के प्रबंधक अरविंद शर्मा और क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुरूप की भूमिका संदिग्ध पाई गई। दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं, माल सप्लाई करने वाली फर्म के संचालक संजय मुखर्जी, उनकी पत्नी देबजानी मुखर्जी और बेटे आदित्य मुखर्जी पर जालसाजी, दस्तावेजों की कूटरचना और गबन का मामला दर्ज किया गया है।3 सितंबर को मुख्य महाप्रबंधक राजेश गुप्ता बोट क्लब पर निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। यहाँ आरोपित अधिकारियों ने क्रूज को फ्लोटिंग रेस्टोरेंट बनाने हेतु खरीदी गई सामग्री दिखाने का प्रयास किया, लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि सामग्री की गुणवत्ता निम्नस्तरीय थी और मात्रा भी स्वीकृत आदेश से कई गुना कम थी।जांच में खुलासा हुआ कि यह संपूर्ण खरीद प्रक्रिया डेढ़ माह में 33 मांगपत्रों की नोटशीट के माध्यम से की गई थी। 15 जुलाई से 31 अगस्त की अवधि में कुल 80 लाख 81 हजार रुपये की खरीद दिखाकर बिल प्रस्तुत किए गए, जिनमें से लगभग 48 लाख रुपये की सप्लाई अधूरी या संदिग्ध पाई गई।
राजेश गुप्ता ने संबंधित नस्ती और बिलों का परीक्षण कर अनियमितताओं की पुष्टि की। इसके बाद विंड एंड वेव्स रेस्टोरेंट में भौतिक सत्यापन किया गया, जहाँ सामग्री की भारी कमी और गुणवत्ता में हेरफेर स्पष्ट मिला।पर्यटन निगम ने फिलहाल केवल एक नस्ती की जांच की है। बाकी 32 बिलों की जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है, जो आगे की कार्रवाई करेगी।मामले के उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और जांच एजेंसी इस वित्तीय घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।