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भारत की ड्रोन निगरानी से बढ़ी बांग्लादेश की बेचैनी, सीमा सुरक्षा पर डीजी स्तर की वार्ता में उठेगा मुद्दा,

भारत द्वारा सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने बांग्लादेश की चिंता बढ़ा दी है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा सीमा क्षेत्रों में किए जा रहे ड्रोन निगरानी अभियान को आगामी 7 जून से नई दिल्ली में होने वाली दोनों देशों की सीमा सुरक्षा बलों की उच्चस्तरीय बैठक में उठाने का निर्णय लिया है।7 से 11 जून तक आयोजित होने वाली पांच दिवसीय डायरेक्टर जनरल स्तर की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। बीजीबी ने बीएसएफ पर कथित रूप से लोगों को जबरन बांग्लादेश में भेजने का आरोप लगाया है और इस विषय को भी बैठक में प्रमुखता से उठाने की तैयारी की है।बीजीबी सीमा के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में बीएसएफ द्वारा ड्रोन के उपयोग तथा उससे जुड़े हवाई क्षेत्र की सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है। बैठक में बीजीबी के महानिदेशक मेजर जनरल अशरफुज्जमां सिद्दीकी के नेतृत्व में 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भाग लेगा। भारत द्वारा सीमा क्षेत्रों में ड्रोन तैनाती का उद्देश्य पूरी तरह सुरक्षा आधारित है। बीएसएफ इन ड्रोन का उपयोग अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी, पशु तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने के लिए करती है। सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए ड्रोन निगरानी आधुनिक सीमा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।भारत की “स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट” नीति के अंतर्गत अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

बीएसएफ विशेष रूप से खुले इलाकों, नदी क्षेत्रों और घने जंगलों वाले सीमावर्ती हिस्सों में इजरायल निर्मित उन्नत ड्रोन तथा रडार युक्त मानव रहित विमान (यूएवी) का उपयोग कर रही है। इन प्रणालियों की मदद से चौबीसों घंटे निगरानी संभव हो पाती है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सकता है।हाल के वर्षों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तकनीकी निगरानी की आवश्यकता और बढ़ गई है। सीमा पार अपराध, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ड्रोन निगरानी एक प्रभावी उपकरण के रूप में उभरी है। बांग्लादेश द्वारा भी सीमा क्षेत्रों में अपनी निगरानी क्षमताओं को बढ़ाया गया है। पिछले वर्ष ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि बांग्लादेशी सेना ने तुर्की निर्मित बायरकतर टीबी-2 ड्रोन को भारतीय सीमा से सटे क्षेत्रों में तैनात किया है। इन ड्रोनों की गतिविधियों को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीरता से लिया था और इसके बाद भारत ने भी अपनी निगरानी प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ किया।आधुनिक तकनीक के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच संवाद और समन्वय आवश्यक है। भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का समाधान भी आपसी वार्ता के माध्यम से ही संभव है।नई दिल्ली में होने वाली डीजी स्तर की बैठक पर दोनों देशों की निगाहें टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि सीमा सुरक्षा, अवैध गतिविधियों की रोकथाम और तकनीकी निगरानी से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा होगी, जिससे द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

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