
Narendra Modi के इटली दौरे के दौरान भारत और Giorgia Meloni ने दोनों देशों के संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के नए चरण में प्रवेश करने वाला बताया है। रोम में प्रधानमंत्री मेलोनी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया, जिसने भारत-इटली संबंधों की बढ़ती निकटता को स्पष्ट संकेत दिया है।हाल के वर्षों में भारत और इटली के बीच रक्षा, तकनीक, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। इसी संदर्भ में भारत ने इटली के समक्ष पाकिस्तान को रक्षा उपकरण और संवेदनशील सैन्य तकनीक उपलब्ध कराने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने पिछले महीने अपने इतालवी समकक्ष Guido Crosetto के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में स्पष्ट रूप से कहा था कि पाकिस्तान को रक्षा तकनीक और हथियारों की आपूर्ति भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्नत सैन्य प्रणालियों का दुरुपयोग सीमा-पार आतंकवादी गतिविधियों में किया जा सकता है।भारत ने पाकिस्तान को पूर्व में की गई इतालवी रक्षा आपूर्ति का भी उल्लेख किया। इतालवी कंपनियों द्वारा पाकिस्तान को हेलीकॉप्टर, ड्रोन, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, नौसैनिक उपकरण, रडार और गोला-बारूद उपलब्ध कराए गए हैं।इतालवी अधिकारियों ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि भारत को दी जाने वाली उन्नत रक्षा तकनीक केवल भारत के लिए आरक्षित रहेगी और उसे किसी तीसरे देश के साथ साझा नहीं किया जाएगा।पाकिस्तान और इटली के बीच रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। Stockholm International Peace Research Institute तथा इटली सरकार की रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी सैन्य आधुनिकीकरण परियोजनाओं के लिए इटली से बड़ी मात्रा में हथियार खरीदता रहा है। वर्ष 2018 में इटली ने पाकिस्तान को लगभग 762 मिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात को मंजूरी दी थी।
इसके अलावा इटली की प्रमुख रक्षा कंपनी Leonardo S.p.A. भारत में नौसेना हेलीकॉप्टर और रक्षा तकनीक से जुड़े बड़े अनुबंध हासिल करने की दिशा में सक्रिय है। इसी कारण भारत ने इटली से अपेक्षा जताई है कि वह अपनी संवेदनशील रक्षा तकनीकों को पाकिस्तान के साथ साझा न करे।प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को भारत-इटली संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इटली भारत की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान को हथियार निर्यात पर किसी प्रकार की सीमाएं या प्रतिबंध लागू करेगा।