अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM) में राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण वर्कशॉप का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की जैव-विविधता उपलब्धियों, संरक्षण प्रयासों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश जैव-विविधता के क्षेत्र में देश ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य “टाइगर स्टेट”, “लेपर्ड स्टेट”, “चीता स्टेट”, “वल्चर स्टेट”, “घड़ियाल स्टेट” और “वुल्फ स्टेट” जैसे गौरवपूर्ण पहचान के साथ वन्यजीव संरक्षण का अग्रणी केंद्र बन चुका है।मुख्यमंत्री ने कहा कि “प्रोजेक्ट चीता” के माध्यम से विलुप्त हो चुके चीते भारत की धरती पर वापस लाए गए हैं और वर्तमान में कूनो और गांधी सागर अभयारण्यों में कुल 53 चीते मौजूद हैं। इनमें से 33 चीते भारत में जन्मे हैं, जो संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जंगली भैंसे, घड़ियाल, गिद्ध और कछुओं सहित कई दुर्लभ प्रजातियों का सफल पुनर्वास और संरक्षण किया गया है।उन्होंने बताया कि राज्य में 5,000 से अधिक वनस्पतियों, 500 पक्षियों की प्रजातियों, 180 से अधिक मछलियों की प्रजातियों और 100 से अधिक हाथियों का प्राकृतिक आवास मौजूद है, जो इसे भारत का सबसे समृद्ध जैव-विविधता वाला राज्य बनाता है।कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav, केंद्रीय राज्य मंत्री Kirti Vardhan Singh सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।इस अवसर पर एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल, “भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट 2026”, चीता संरक्षण पर आधारित ब्रोशर तथा डाक विभाग का विशेष “माय स्टैम्प” भी जारी किया गया। इसके साथ ही IIFM में डेटा ड्रिवन लैब का उद्घाटन किया गया और बिग कैट्स अलायंस तथा राज्य की जैव-विविधता विरासत पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।मुख्यमंत्री ने वन विभाग के मैदानी अमले के लिए नए रेस्क्यू वाहनों और बाइक्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की।केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि जैव-विविधता भारतीय सभ्यता की आत्मा है और इसे संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने मिशन लाइफ और सतत विकास पर जोर देते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं।कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि मध्यप्रदेश की संरक्षण पहलें, विशेषकर कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन, वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन चुकी हैं।