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दतिया विधायक की सदस्यता समाप्त होने पर राजनीतिक हलचल तेज, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल,

दतिया के विधायक Rajendra Bharti की सदस्यता देर रात समाप्त किए जाने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा से उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई और सीट को रिक्त घोषित करते हुए अधिसूचना जारी कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया है।विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को साजिश और संस्थाओं के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है। कांग्रेस का कहना है कि दलबदल कानून में फंसे अन्य विधायकों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जबकि इस मामले में इतनी त्वरित कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। सत्तारूढ़ भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और पार्टी लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पूर्व में पवई के विधायक Prahlad Lodhi के साथ भी इसी तरह की स्थिति बनी थी। उन्हें सजा मिलने के बाद सदस्यता समाप्त की गई थी, लेकिन बाद में उच्च न्यायालय से राहत मिलने पर उनकी सदस्यता बहाल कर दी गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा।इसी प्रकार, भाजपा विधायक Asha Rani के मामले में सजा के बाद उन्हें अदालत से राहत नहीं मिली, जिसके चलते उनकी सदस्यता समाप्त हो गई थी।वर्तमान परिस्थितियों में यह महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या राजेंद्र भारती को भी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिल पाएगी। यदि उन्हें राहत मिलती है, तो उनकी सदस्यता बहाल हो सकती है, अन्यथा दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय माना जा रहा है।

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