चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और चीन को यूक्रेन युद्ध में शांति प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर तीखी टिप्पणी की और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के चाबहार पोर्ट के माध्यम से एससीओ देशों को कारोबार बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया।सम्मेलन के दौरान तीनों नेताओं – पुतिन, शी जिनपिंग और मोदी – की आपसी बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई बहस को जन्म दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिकोण के गठन का समय आ गया है? यह विचार नया नहीं है, बल्कि 1990 के दशक में रूस के पूर्व प्रधानमंत्री येवगेनी प्रीमाकोव ने इसे लोकप्रिय बनाया था। उनका मानना था कि रूस, भारत और चीन अपने मतभेदों के बावजूद बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था स्थापित कर सकते हैं और अमेरिका के नेतृत्व वाले वैश्विक एकाधिकार को चुनौती दे सकते हैं।वर्तमान में अमेरिकी टैरिफ नीतियों से भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और अमेरिका की दबावपूर्ण नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में एससीओ शिखर सम्मेलन से निकला यह संदेश वैश्विक शक्ति संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।