
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर मध्यस्थता की कोशिश तेज कर दी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने सोमवार को तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। बातचीत का मुख्य फोकस क्षेत्र में तनाव कम करना, संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता तलाशना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने जैसे मुद्दों पर रहा।बैठक के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका की मौजूदा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि दबाव और धमकियों के जरिए समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। ईरानी पक्ष का कहना है कि यदि अमेरिका वास्तव में युद्ध खत्म करना और क्षेत्र में स्थायी शांति चाहता है तो उसे ईरान के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलना होगा।पेजेश्कियान ने यह भी संकेत दिया कि ईरान अमेरिकी दबाव के सामने अपनी नीतियों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग और बातचीत के जरिए विवादों के समाधान पर जोर दिया। ईरानी नेतृत्व ने जून में हुए इस्लामाबाद समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।
अमेरिका की ओर से सैन्य विकल्प खुला
दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ सैन्य विकल्प को भी खुला रखा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। उनका कहना है कि अमेरिका ईरान या होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य हमले के विकल्प को खारिज नहीं कर रहा है।अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हैं। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए पलटवार की चेतावनी दी है। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से उम्मीद
पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि ईरान के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के मुताबिक, बातचीत रचनात्मक रही और दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय शांति तथा बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में विचार साझा किए।पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास गहरा है और आर्थिक प्रतिबंधों के साथ सैन्य टकराव की आशंका भी बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता क्या दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की मेज पर ला पाती है।