
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत ने अपनी आधिकारिक दावेदारी प्रस्तुत कर दी है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की इस सीट के लिए भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से माना जा रहा है। ताजिकिस्तान को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के कुछ सदस्य देशों तथा पाकिस्तान का समर्थन मिलने की चर्चा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में भारत की दावेदारी को अधिक मजबूत माना जा रहा है।इस बीच, भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके वरिष्ठ राजनयिक अब्दुल बासित ने भी एक साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि भारत को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की संभावना है। उनके अनुसार, केवल पश्चिमी या एशियाई देश ही नहीं, बल्कि OIC के कई सदस्य देश भी भारत के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।अब्दुल बासित ने कहा कि भारत ने पिछले कई वर्षों में विभिन्न देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार मजबूत किया है। विशेष रूप से अफ्रीकी देशों के साथ भारत की साझेदारी उल्लेखनीय रही है। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीकी देशों के बीच नियमित शिखर सम्मेलन आयोजित होते हैं, जिनके माध्यम से व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। ऐसे में अफ्रीका के अधिकांश देशों का समर्थन भारत को मिलने की संभावना अधिक दिखाई देती है।पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक का मानना है कि ताजिकिस्तान को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भारत और ताजिकिस्तान के बीच भी लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे में यह संभावना भी बनी हुई है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हो और भविष्य के चुनावों को ध्यान में रखते हुए कोई सहमति बनाई जा सके।बासित ने यह भी सुझाव दिया कि यदि ताजिकिस्तान इस बार अपनी दावेदारी वापस लेता है तो भारत भविष्य में उसकी उम्मीदवारी का समर्थन कर सकता है। उनके अनुसार, इस प्रकार का सहयोग दोनों देशों के हित में होगा और इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र से भारत सर्वसम्मति से उम्मीदवार बन सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक भारत या ताजिकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता का समर्थक रहा है। भारत का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा परिषद की संरचना अधिक प्रतिनिधिक और समावेशी होनी चाहिए। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था, तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारत स्वयं को सुरक्षा परिषद में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के योग्य मानता है।
संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में भारतीय सैनिकों और पुलिस बल का योगदान विश्व स्तर पर सराहा जाता रहा है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और विकासशील देशों के हितों से जुड़े मुद्दों पर भी भारत ने लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है। यही कारण है कि अनेक देशों के साथ उसके रणनीतिक और विकासात्मक संबंध मजबूत हुए हैं। यदि वर्तमान परिस्थितियां इसी प्रकार बनी रहती हैं तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के चुनाव में भारत की स्थिति मजबूत रह सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्य देशों के मतदान से होगा और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परिणाम स्पष्ट होंगे।भारत की उम्मीदवारी को लेकर वैश्विक स्तर पर जारी समर्थन और विभिन्न देशों के साथ उसके मजबूत संबंध इस चुनाव को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बना रहे हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण सीट के लिए सदस्य देशों का अंतिम समर्थन किस उम्मीदवार के पक्ष में जाता है।