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विकसित भारत@2047 के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करें विश्वविद्यालय : राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल,

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भारत@2047” के संकल्प को साकार करने में प्रदेश के युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों को अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक सशक्त करें।राज्यपाल श्री पटेल गुरुवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन, समन्वय और उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को सलाह दी कि वे प्रत्येक दो वर्ष में अपने सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों (एलुमनाई) का प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करें, जिससे वर्तमान विद्यार्थियों को प्रेरणा, मार्गदर्शन और रोजगार संबंधी अवसरों की जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा और पूर्व विद्यार्थियों से संस्थागत जुड़ाव भी मजबूत होगा।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विश्वभर में योग की बढ़ती स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालयों में नियमित योग गतिविधियों को साप्ताहिक एवं मासिक कार्यक्रमों के रूप में शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है, जिससे विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।राज्यपाल श्री पटेल ने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया।उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में भेजते हैं। इस विश्वास को बनाए रखना कुलपतियों, कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल ज्ञान और कौशल ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया।राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से गांवों को गोद लेने, विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण एवं विकास गतिविधियों में सहभागी बनाने तथा पिछड़े और जनजातीय क्षेत्रों के विकास से जुड़ी योजनाओं—पीएम-जनमन और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना—के प्रभावी क्रियान्वयन में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव विद्यार्थियों में समाज के वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव विकसित करेंगे।

बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर विशेष बल देते हुए कहा कि वित्तीय प्रावधानों एवं शासन के निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। उन्होंने कुलगुरुओं से वित्तीय नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।मंत्री श्री परमार ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, लेकिन विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की जानकारी आयोग के पोर्टल पर स्वतः प्रदर्शित करने की व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जानी चाहिए।बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव श्री सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु तथा उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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