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रूस और म्यांमार का संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास ‘MARUMEX 2025’ अंडमान सागर में शुरू,

भारत के पड़ोसी देश म्यांमार के तट पर इन दिनों रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े के युद्धपोत मौजूद हैं। इस दौरान रूस और म्यांमार की नौसेनाओं के बीच संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास ‘MARUMEX 2025’ आयोजित किया जा रहा है।इस अभ्यास में रूस की ओर से फ्रिगेट ‘मार्शल शापोशनिकोव’, कोर्वेट ‘ग्रेम्यश्ची’ और टैंकर ‘बोरिस बुटोमा’ शामिल हैं। बताया गया है कि यह युद्धाभ्यास अंडमान सागर में किया जा रहा है — जो रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, क्योंकि यहीं भारत का अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह स्थित इंटीग्रेटेड ट्राई-सर्विस कमांड मौजूद है, जहां थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त इकाइयाँ तैनात हैं।यह युद्धाभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब म्यांमार गृहयुद्ध की स्थिति से गुजर रहा है। इस क्षेत्र में विदेशी नौसेनाओं की सक्रियता को लेकर रणनीतिक विश्लेषक इसे दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में शक्ति-संतुलन से जुड़ा कदम मान रहे हैं।

पनडुब्बियों की खोज और आतंकवाद-रोधी अभ्यास

रूसी प्रशांत बेड़े ने अपने बयान में बताया कि युद्धाभ्यास का उद्घाटन थिलावा बंदरगाह पर किया गया। इसके तहत दोनों नौसेनाएं:

  • नौसैनिक नियंत्रण संचालन का संयुक्त अभ्यास करेंगी,
  • दुश्मन की काल्पनिक पनडुब्बियों की खोज और ट्रैकिंग का मिशन पूरा करेंगी,
  • तोपखाने और टॉरपीडो अभ्यास करेंगी,
  • और समुद्री डाकुओं के कब्जे से जहाज की मुक्ति की ड्रिल में भाग लेंगी।

साथ ही, आतंकवाद-रोधी निरीक्षण दल भी इस अभियान में शामिल हैं, जिनका उद्देश्य जहाजों की सुरक्षा और बोर्डिंग ऑपरेशन के दौरान त्वरित कार्रवाई की तैयारी सुनिश्चित करना है।रूसी नौसेना ने कहा कि इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सैन्य सहयोग को मज़बूत करना, साझा प्रशिक्षण अनुभव बढ़ाना, और दक्षिण-पूर्व एशियाई समुद्री मार्गों में नागरिक जहाजों व आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान सागर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह अभ्यास भारत सहित क्षेत्रीय देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि यह हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती नौसैनिक सक्रियता का संकेत देता है।

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