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मध्यप्रदेश में मौसम का बड़ा बदलाव: लू और भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, 6 जिलों में अलर्ट जारी,

भोपाल। मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। पिछले कई दिनों तक आंधी और बारिश से राहत देने वाला मौसम अब भीषण गर्मी और लू में बदल गया है। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।सोमवार को रतलाम में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन के सबसे अधिक तापमानों में से एक है। इसी के साथ प्रदेश के कई जिलों में गर्म हवाओं का असर तेज हो गया हैमौसम विभाग ने मंगलवार के लिए उज्जैन, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, रतलाम और झाबुआ जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया है।मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार अगले चार दिनों तक इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में गर्म हवाओं का प्रभाव लगातार बना रहेगा। इन क्षेत्रों में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।इस वर्ष तापमान पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है, जिससे गर्मी का असर ज्यादा तीव्र महसूस किया जा रहा है।दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी बढ़ गया है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। ग्वालियर, श्योपुर और नर्मदापुरम में रात के समय भी उमस और गर्मी बनी हुई है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।प्रदेश में 30 अप्रैल से 10 मई तक लगातार आंधी और बारिश का दौर जारी था।

कई शहरों में बढ़ा तापमान

राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखा जा रहा है।

  • तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान
  • इंदौर में सोमवार को 43.2 डिग्री तापमान दर्ज, जो इस सीजन का सर्वाधिक रहा
  • रतलाम, नीमच और मंदसौर में गर्मी का असर सबसे अधिक
 यह स्थिति पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवातीय परिसंचरण और ट्रफ लाइन के प्रभाव के कारण बनी हुई थी।लेकिन अब मौसम प्रणाली कमजोर पड़ने के बाद गर्म हवाओं ने तेजी से असर दिखाना शुरू कर दिया है और प्रदेश में लू की स्थिति बन गई है।मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से दोपहर के समय बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त पानी पीने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने को कहा गया है।अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में गर्मी और लू का प्रभाव और बढ़ सकता है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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